Varada Pasham
Varada Pasham
तेलंगाना में कमजोर मानसून और सूखे जैसे हालात के बीच गांव ने सदियों पुरानी परंपरा को फिर से जीवित किया है. महबूबाबाद जिले के गुंडमराजुपल्ली गांव के लोगों ने अच्छी बारिश की कामना के लिए करीब 20 साल बाद 'वरदापाशम' नाम की अनोखी धार्मिक रस्म निभाई. इस परंपरा में गांव के बच्चे, महिलाएं और पुरुष एक बड़े पत्थर पर चढ़ाए गए प्रसाद को अपनी जीभ से चाटते हैं. ग्रामीणों का मानना है कि ऐसा करने से वर्षा के देवता प्रसन्न होते हैं और अच्छी बारिश होती है.
20 साल बाद दोबारा निभाई गई परंपरा
महबूबाबाद जिले के चिन्नागुडूर मंडल के गुंडमराजुपल्ली गांव में यह परंपरा तब निभाई जाती है, जब लंबे समय तक बारिश नहीं होती. ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले करीब 20 सालों से इस रस्म की जरूरत नहीं पड़ी थी, क्योंकि हर साल पर्याप्त बारिश हो जाती थी. लेकिन इस बार मानसून कमजोर रहने और फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ने के बाद गांव वालों ने फिर से इस प्राचीन परंपरा का सहारा लिया.
पहले देवी की पूजा, फिर पत्थर पर चढ़ाया प्रसाद
इस अनोखी रस्म की शुरुआत गांव के तालाब के पास स्थित कट्टा मैसम्मा देवी की विशेष पूजा-अर्चना से हुई. इसके बाद गांव वालों ने चावल, गुड़ और दूध से एक मीठा प्रसाद तैयार किया. इस प्रसाद को एक बड़े पवित्र पत्थर पर फैलाया गया. फिर गांव के पुरुष, महिलाएं और बच्चे बिना हाथ लगाए केवल अपनी जीभ से उस प्रसाद को चाटते हैं. ग्रामीणों का मानना है कि यह प्रकृति, धरती माता और वर्षा के देवता भगवान वरुण के प्रति श्रद्धा और विनम्रता प्रकट करने का प्रतीक है.
पीढ़ियों से चली आ रही है मान्यता
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है. इसे केवल तब किया जाता है, जब गांव में लंबे समय तक बारिश नहीं होती और सूखे जैसी स्थिति बन जाती है. इस बार गांव के कई युवाओं ने पहली बार इस अनोखी रस्म को अपनी आंखों से देखा. उनके लिए यह सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपने गांव की सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का भी अवसर बना.
गांव में आज भी जीवित हैं पारंपरिक रीति-रिवाज
ग्रामीणों ने बताया कि 'वरदापाशम' के अलावा गांव में 'वनभोजनालु' की भी परंपरा है. इसमें अलग-अलग समुदाय जंगल में सामूहिक भोज का आयोजन करते हैं. यह आयोजन सामाजिक एकता और पारंपरिक संस्कृति को मजबूत करने का माध्यम माना जाता है.
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