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Chanakya Niti: बुरे समय में साथ देने वाले और छोड़ने वाले के बारे में क्या कहते हैं आचार्य चाणक्य?

चाणक्य नीति का मुख्य उद्देश्य है कि इंसान अपने जीवन को बेहतर बनाए, सोच को सकारात्मक रखे और सही फैसले लेकर आगे बढ़े.

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आचार्य चाणक्य इतिहास के उन महान व्यक्तियों में से एक हैं, जिन्होंने जीवन जीने के व्यवहार, नीति, समझदारी और सफलता के तरीकों के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं. उनकी नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक लगती है और हर दौर में लोगों को सही दिशा दिखाती रही हैं. चाणक्य नीति का मुख्य उद्देश्य है कि इंसान अपने जीवन को बेहतर बनाए, सोच को सकारात्मक रखे और सही फैसले लेकर आगे बढ़े. चाणक्य कहते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को जीवन में सफल होना है, तो उसे चार बातों से बिल्कुल नहीं डरना चाहिए. जानते हैं वो बातें कौन सी हैं. 

मीठी बातों से सावधान रहने की सलाह
चाणक्य नीति यह भी सिखाती है कि केवल मीठी बातें करने वाले लोग हर समय भरोसेमंद नहीं होते. कठिन समय में कई लोग दिलासा तो देते हैं, लेकिन जिम्मेदारी उठाने से पीछे हट जाते हैं. ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखना ही समझदारी मानी गयी है, क्योंकि ये अवसर देखकर साथ बदल सकते हैं.

स्वार्थी लोगों से रखें दूरी
आचार्य चाणक्य ने स्वार्थ को रिश्तों का सबसे बड़ा दुश्मन बताया है. जो लोग सिर्फ अपने फायदे के लिए पास रहते हैं, वे संकट आते ही किनारा कर लेते हैं. ऐसे लोगों को पहचानकर उनसे सीमित दूरी बनाना व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है.

कठिन समय देता है सही सीख
चाणक्य नीति के अनुसार, विपरीत परिस्थितियां इंसान को कमजोर नहीं, बल्कि समझदार बनाती हैं. यह समय बताता है कि किस पर भरोसा किया जा सकता है और किससे सतर्क रहने की जरूरत है. इसलिए कठिन दौर को सीख के रूप में स्वीकार करना चाहिए.

विवेक ही सबसे बड़ा सहारा
चाणक्य कहते हैं कि जीवन में रिश्ते निभाते समय विवेक का साथ जरूरी है. भावनाओं में बहकर लिया गया फैसला कई बार नुकसानदेह साबित होता है. जो व्यक्ति धैर्य और समझदारी से रिश्तों को परखता है, वही जीवन में स्थिरता और संतुलन बनाए रखता है.

जो मुश्किल में साथ दे, वही अपना
चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति आपके बुरे वक्त में बिना स्वार्थ के मदद के लिए आगे आए, वही आपका सच्चा अपना होता है. ऐसे लोग न तो परिस्थितियों से डरते हैं और न ही अपने लाभ-हानि का हिसाब लगाते हैं. संकट के समय साथ खड़ा होना, सांत्वना देना और समाधान खोजने में मदद करना सच्चे रिश्ते की पहचान है.