Effort Recession India 2026
Effort Recession India 2026
ऑफिस में समय पर आना, तय जिम्मेदारियां निभाना और फिर काम खत्म होते ही घर लौट जाना... आजकल बड़ी संख्या में कर्मचारी इसी तरीके से काम कर रहे हैं. पहले की तरह बिना कहे अतिरिक्त जिम्मेदारी लेना या कंपनी के लिए जरूरत से ज्यादा मेहनत करना अब कम होता जा रहा है. Great Place To Work India की 2026 रिपोर्ट में इसे 'Effort Recession' यानी अतिरिक्त प्रयास में गिरावट का नाम दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की 63 फीसदी कंपनियों ने माना है कि कर्मचारियों का एक्स्ट्रा काम पहले के मुकाबले कम हुआ है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह कर्मचारियों और नेतृत्व के बीच घटता भरोसा और जुड़ाव बताया गया है.
Great Place To Work India की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में शामिल 380 भारतीय कंपनियों में से 240 यानी 63 फीसदी संगठनों ने माना कि पिछले साल की तुलना में कर्मचारियों की अतिरिक्त मेहनत में कमी आई है. औसतन इसमें 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. रिपोर्ट में 'Discretionary Effort' का मतलब उस अतिरिक्त काम से है, जिसे कोई कंपनी कर्मचारियों से जबरदस्ती नहीं करवा सकती. जैसे बिना कहे देर तक रुक कर काम करना, अपनी जिम्मेदारी से बाहर जाकर किसी समस्या का समाधान निकालना या कंपनी के हित में अतिरिक्त पहल करना.
इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा गिरावट रिटेल सेक्टर में देखी गई, जहां 88 फीसदी कंपनियों ने कर्मचारियों की अतिरिक्त मेहनत कम होने की बात कही. इसके बाद आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में 77-77 फीसदी कंपनियां प्रभावित रहीं. कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट में यह आंकड़ा 71 फीसदी रहा. वहीं, फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में 62 फीसदी कंपनियों ने गिरावट दर्ज की, जबकि मैन्युफैक्चरिंग सबसे बेहतर स्थिति में रहा. यहां केवल 44 फीसदी कंपनियों में ही अतिरिक्त मेहनत में कमी देखी गई और औसतन गिरावट सिर्फ 3 फीसदी रही.
सीनीयर का व्यवहार सबसे बड़ा कारण
रिपोर्ट बताती है कि कर्मचारियों की अतिरिक्त मेहनत का सबसे बड़ा संबंध उनके नेताओं के व्यवहार से है. जिन कर्मचारियों को लगा कि उनके लीडर उनकी परवाह करते हैं, उनमें 99 फीसदी तक अतिरिक्त मेहनत करने की भावना देखने को मिली. वहीं, जिन कर्मचारियों को ऐसा महसूस नहीं हुआ, वहां यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 29 फीसदी रह गया. इसी तरह, जब कर्मचारियों को अपने लीडर प्रेरणादायक लगे तो 98 फीसदी लोगों ने अतिरिक्त प्रयास किए. लेकिन प्रेरणा की कमी होने पर यह आंकड़ा 32 फीसदी तक सिमट गया. कर्मचारियों की बात सुनना, उनके काम की तारीफ करना और समय पर जानकारी शेयर करना भी उनकी मेहनत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
सिर्फ ट्रेनिंग नहीं, भरोसा ज्यादा जरूरी
रिपोर्ट के अनुसार, केवल ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट या करियर ग्रोथ के अवसर देने से कर्मचारियों की अतिरिक्त मेहनत में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आता. सबसे ज्यादा असर इस बात का पड़ता है कि मैनेजर अपने कर्मचारियों के साथ रोजमर्रा के व्यवहार में कितना सम्मान, भरोसा और सहयोग दिखाते हैं.
Gen Z और AI ने बढ़ाई नई चुनौती
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारत की कुल वर्कफोर्स में Gen Z की हिस्सेदारी अब 26 फीसदी हो चुकी है, जो 2023 के मुकाबले लगभग दोगुनी है. इसी समय कंपनियां AI के बढ़ते इस्तेमाल से भी जूझ रही हैं. करीब 58 फीसदी CHRO का कहना है कि उन्हें एक साथ Gen Z कर्मचारियों की सोच और AI से हो रहे बदलावों को संभालना पड़ रहा है. वहीं, आधे से ज्यादा HR मानते हैं कि वे अभी भी यह पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि युवा कर्मचारियों को सबसे ज्यादा क्या इफेक्ट करता है.
ये भी पढ़ें: