Puffer-fishing
Puffer-fishing
आज की डेटिंग दुनिया पहले से काफी बदल चुकी है. अब लोग किसी को पसंद भी करते हैं, उसकी इंस्टाग्राम स्टोरी रोज देखते हैं, घंटों चैट करते हैं, बातें भी करते हैं… लेकिन जैसे ही रिश्ता थोड़ा सीरियस होने लगता है, अचानक दूरियां बनाने लगते हैं. कभी रिप्लाई देर से आने लगते हैं, कभी स्पेस चाहिए जैसे मैसेज आने लगते हैं. इस नए व्यवहार को पफर-फिशिंग डेटिंग कहा जा रहा है.
आखिर क्या है पफर-फिशिंग?
पफर-फिशिंग का मतलब है किसी रिश्ते में भावनात्मक नजदीकी बढ़ते ही खुद को पीछे खींच लेना. शुरुआत में व्यक्ति काफी इंटरेस्ट दिखाता है, लेकिन जैसे ही रिश्ता गहरा होने लगता है, वह दूरी बनाने लगता है. यह बिल्कुल वैसे ही है जैसे समुद्र में पफर फिश खतरा महसूस होते ही खुद को फुलाकर बचाव करने लगती है. डेटिंग में भी कुछ लोग इमोशनली इंटीमेसी को खतरे की तरह महसूस करने लगते हैं और खुद को बचाने के लिए दूरी बना लेते हैं.
रिश्तों में यह व्यवहार कैसे दिखता है?
पफर-फिशिंग करने वाले लोग शुरुआत में काफी अटैच्ड नजर आते हैं. वे लगातार मैसेज करते हैं, केयर दिखाते हैं और सामने वाले को स्पेशल महसूस कराते हैं. लेकिन अचानक उनका व्यवहार बदलने लगता है. वे देर से रिप्लाई करने लगते हैं, कमिटमेंट से बचने लगते हैं, सीरीयस बातें करने से घबराते हैं ऐसे में कई बार सामने वाला व्यक्ति समझ ही नहीं पाता कि आखिर गलती कहां हुई.
Gen Z में क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज की जनरेशन सिचुएशनशिप, धोस्टिंग और इमोशनल बर्नआउट जैसे अनुभवों के बीच बड़ी हुई है. ऐसे में कई लोगों को इमोशनल अटैचमेंट से डर लगने लगा है. वे प्यार तो चाहते हैं, लेकिन vulnerability यानी अपनी भावनाएं पूरी तरह दिखाने से घबराते हैं. उन्हें लगता है कि ज्यादा करीब आने से हार्ट ब्रेक या रिजेक्शन का खतरा बढ़ सकता है. यही वजह है कि रिश्ता गंभीर होते ही उनका दिमाग खुद को इमोशनली प्रोटेक्ट करने लगता है.
क्या यह जानबूझकर किया जाता है?
जरूरी नहीं कि पफर-फिशिंग करने वाले लोग बुरे इरादे से ऐसा करें. कई बार वे खुद भी नहीं समझ पाते कि वे रिश्ते से क्यों भाग रहे हैं. असल में यह Emotional defence mechanism की तरह काम करता है. यानी इंसान खुद को चोट से बचाने के लिए दूरी बना लेता है. लेकिन दिक्कत तब होती है जब यह आदत हर रिश्ते को खराब करने लगे.
रिश्तों पर क्या असर पड़ता है?
बार-बार दूरी बनाने से रिश्ता कमजोर होने लगता है. सामने वाला व्यक्ति कंफ्यूज्ड महसूस करता है और भरोसा कम होने लगता है. धीरे-धीरे रिश्ता माइंड गेम्स और मिक्स्ड सिग्नल में बदल जाता है, जहां एक व्यक्ति पास आना चाहता है और दूसरा बार-बार पीछे हट जाता है. एक समय बाद यह व्यवहार हेल्दी रिलेशनशिप बनने से रोक देता है.
क्या रिश्ते में दिल की बातें शेयर करना जरूरी है?
एक मजबूत रिश्ता सिर्फ रोज चैट करने, स्टोरी देखने या ख्याल रखना बोलने से नहीं चलता. रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि दोनों लोग अपनी असली फीलिग्स एक-दूसरे के साथ शेयर कर सकें. मतलब अगर आपको किसी बात का डर है, insecurity है या कोई बात परेशान कर रही है, तो उसे छिपाने के बजाय सामने वाले से खुलकर कहना जरूरी होता है. अगर हर बार फीलिंग्गस हरी होते ही इंसान भागने लगे, तो रिश्ता लंबे समय तक टिक पाना मुश्किल हो जाता है.
कैसे पहचानें कि आप भी पफर-फिशिंग कर रहे हैं?
अगर हर रिश्ता सीरियस होते ही आपको घबराहट होने लगे, आप अचानक दूरी बनाने लगें या इमोशनल बातों से बचने लगें, तो यह पफर-फिशिंग का संकेत हो सकता है.
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