Shah will be exiting from the role at CRED, as he takes a new role at Meta’s WhatsApp.
Shah will be exiting from the role at CRED, as he takes a new role at Meta’s WhatsApp.
सक्सेस की कहानियां अक्सर लोगों को मोटिवेट करती हैं, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी भी होती हैं जो यह साबित कर देती हैं कि मेहनत और सही सोच के दम पर कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है. ऐसी ही एक कहानी है कुणाल शाह की. कभी परिवार की आर्थिक मदद के लिए छोटे-छोटे काम करने वाले कुणाल शाह आज दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में पहचान बना चुके हैं. उनकी सफलता का सफर ने लाखों युवाओं के लिए मोटिवेशन बन गया है.
कुणाल शाह का बचपन काफी कठिन हालात से भरा रहा. उनके पिता का कारोबार बंद हो गया था, जिसके बाद परिवार फाइनेंशियल मुश्किलें शुरू हो गईं. ऐसे समय में उन्होंने कम उम्र में ही कमाना शुरू कर दिया. बताया जाता है कि 14-15 साल की उम्र में ही उन्होंने कई तरह के छोटे-बड़े काम किए. कभी डिलीवरी बॉय बने, कभी डेटा एंट्री ऑपरेटर का काम किया. इसके अलावा उन्होंने मेहंदी कोन बेचे, साइबर कैफे चलाया और कंप्यूटर ट्यूटर के रूप में भी काम किया. इन एक्सपीरियंस से उन्होंने जीवन में बहुत कुछ सीखा.
कुणाल शाह ने मुंबई के विल्सन कॉलेज से फिलॉसफी की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने MBA में दाखिला लिया, लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी. उनका मानना था कि केवल किताबों से नहीं, बल्कि जीवन के एक्सपीरियंस से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है. उन्होंने हमेशा नई चीजें सीखने और परेशानियों का रास्ता खोजने पर जोर दिया.
कुणाल शाह ने अपने स्टार्टअप सफर की शुरुआत डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म फ्रीचार्ज से की. यह उस समय भारत के सबसे पॉपुलर स्टार्टअप्स में से एक बन गया. लोगों ने इसे काफी पसंद किया और बाद में इस कंपनी को टेकओवर कर लिया गया. फ्रीचार्ज की सफलता ने कुणाल शाह को भारतीय स्टार्टअप की दुनिया में एक नई पहचान दिलाई.
फ्रीचार्ज के बाद उन्होंने साल 2018 में क्रेड की शुरुआत की. यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो समय पर क्रेडिट कार्ड बिल भरने वाले कस्टूमर्स को रिवॉर्ड देता है. कुछ ही सालों में क्रेड भारत की पॉपुलर फिनटेक कंपनियों में शामिल हो गई. पेटीएम जैसे कई फिनटेक के बीच पहचान बनाना क्रेड के लिए थोड़ा मुश्किल जरूर था. आज इसके करोड़ों यूजर्स हैं और यह युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है.
हाल ही में मेटा ने उन्हें वॉट्सऐफ के ग्लोबल हेड की जिम्मेदारी सौंपी है. यह उनके मेहनत का रिजल्ट है. उनकी सफर दिखाता है कि अगर व्यक्ति में सीखने की इच्छा, मेहनत करने का जज्बा और बड़ा सोचने का साहस हो तो वह किसी भी ऊंचाई तक पहुंच सकता है.
कुणाल शाह की कहानी यह सिखाती है कि सफलता केवल डिग्री या बड़े रिसोर्स पर निर्भर नहीं करती. लगातार सीखना, चुनौतियों का सामना करना और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखना ही असली सफलता की कुंजी है.