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Calcutta High Court Order: पत्नी नहीं कर सकती पति को उसके मां-बाप से अलग, हाई कोर्ट ने कहा- मानसिक क्रूरता के आधार पर दायर कर सकते हैं तलाक 

Calcutta High Court Order: पत्नी अपने पति को उसके मां-बाप से अलग नहीं कर सकती है. अगर वह ऐसा करती है तो मानसिक क्रूरता के आधार पर पति तलाक दायर कर सकता है.

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हाइलाइट्स
  • मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक 

  • 2009 का है मामला

बूढ़े मां-बाप पर अत्याचार न हो और वे सुरक्षित रहें इसको लेकर लगातार बात चलती रहती है. अब इसी कड़ी में कलकत्ता हाई कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि अगर पत्नी अपने पति को माता-पिता से दूर जाने के लिए मजबूर करती है तो पति को तलाक के लिए फाइल करने का अधिकार है. कोर्ट ने कहा कि एक बेटे का अपने माता-पिता की देखभाल करना "पवित्र दायित्व" (pious obligation) है. 

मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक 

हाई कोर्ट ने आगे कहा कि मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक दायर किया जा सकता है. अगर पत्नी बिना किसी उचित कारण के पति को उसके माता-पिता से अलग करने की कोशिश करती है तो ऐसा किया जा सकता है. कोर्ट ने कहा, "माता-पिता का रहना और उनका भरण-पोषण करना बेटे का दायित्व है. अपने माता-पिता के साथ रहने वाला एक बेटा भारतीय संस्कृति में बिल्कुल सामान्य है.”

2009 का है मामला

जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस उदय कुमार की बेंच ने पिछले महीने एक महिला की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने अपने पति को तलाक देने के फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. दरअसल, यह मामला 2009 का है जब पश्चिम मिदनापुर की एक फैमिली कोर्ट ने क्रूरता के आधार पर प्रशांत कुमार मंडल को उनकी पत्नी झरना से तलाक को मंजूरी दे दी थी. हाई कोर्ट की बेंच महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आदेश को चुनौती दी गई थी. फैमिली कोर्ट का फैसला इस आधार पर था कि झरना सार्वजनिक रूप से प्रशांत का अपमान कर रही थीं, उसे 2001 में अपनी शादी के बाद से बेरोजगार और कायर कह रही थी. प्रशांत, जो स्कूलों में पार्ट-टाइम शिक्षक और एक निजी ट्यूटर थे, कभी-कभी झरना से आर्थिक मदद करने के लिए कहते थे.

हालांकि, प्रशांत को एक सरकारी नौकरी भी मिलने वाली थी लेकिन वह मिलते-मिलते रह गई थी. क्योंकि झरना ने प्रशांत और उनके माता-पिता के खिलाफ टॉर्चर के आरोप में एक आपराधिक मामला दर्ज कर दिया था.