scorecardresearch

गुस्सा आता है सबको, फ्रस्ट्रेस होता है हर कोई.. लेकिन विदेशी क्लाइंट करते हैं शांत तरीके से जाहिर

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक महिला ने एक ऐसा पोस्ट शेयर किया है जिससे बहस छिड़ गई है. उन्होंने भारतीय और विदेशी क्लाइंट्स के बीच नराजागी जताने को लेकर अपना बात लिखा है. जिसपर लोग अनेक रिएक्शन दे रहे हैं.

Representative Image (AI) Representative Image (AI)

ग्लोबल वर्क कल्चर में अलग-अलग देशों के लोगों के साथ काम करना एक आम बात है. ऐसे माहौल में केवल काम की क्वालिटी ही नहीं, बल्कि बात करने का तरीका भी काफी अच्छा होना जरूरी है. हाल ही में एक प्रोफेशनल ने अपने एक्सपीरियंस को सोशल मीडिया पर शेयर किया है. उन्होंने पोस्ट में बताया गया कि भारतीय और विदेशी क्लाइंट्स दोनों ही काम के दौरान नाराज या परेशान होते हैं, लेकिन अपनी बात को पेश करने के तरीके में दोनों में बहुत फर्क है.

श्रेया नाम की एक प्रोफेशनल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने एक्सपीरियंस शेयर किया. उन्होंने बताया कि वह दुनिया के 50 से ज्यादा लोकेशन के क्लाइंट्स के साथ काम कर रही हैं. उनके अनुसार, हर जगह लोगों को काम के दौरान चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन विदेशी क्लाइंट्स आमतौर पर अपनी नाराजगी को कंट्रोल्ड वे में पेश करते हैं. अधिक संयमित और पेशेवर तरीके से व्यक्त करते हैं.

क्या कहना है श्रेया का?

श्रेया करीब 50 से ज्यादा क्लाइंट्स के साथ ग्लोबली काम करती है. वह लिखती हैं कि उन्होंने देखा है कि कई विदेशी क्लाइंट्स काम के मामले में गुस्से अपनी आवाज ऊंची नहीं करते, वे भाषा पर भी काबू रखते है. विदेशी क्लाइंट्स को लेकर उनका कहना है कि वे अपने विचारों को सही शब्दों और शांत लहजे में सामने रखते हैं.

गुस्सा दिखाना पर कंट्रोल में

अपने पोस्ट में श्रेया ने कहा कि विदेशी क्लाइंट्स की कम्यूनिकेशन स्किल से उन्होंने काफी कुछ सीखा है. उनका मानना है कि किसी भी स्थिति में सम्मान बनाए रखते हुए अपनी बात रखना एक जरूरी स्किल है. उन्होंने यह भी कहा कि वह इस स्किल को अपने पेशेवर जीवन के साथ-साथ निजी जीवन में भी अपनाना चाहती हैं. उनके अनुसार, असहमति या नाराजगी व्यक्त करना गलत नहीं है, लेकिन उसे किस तरीके से व्यक्त किया जाता है, यही किसी व्यक्ति के पेशेवर बिहेवियर को दिखाता है.

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

श्रेया की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और इस पर लोगों की अलग-अलग रिएक्शन देखने को मिले. कुछ यूजर्स ने उनके विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि वर्कप्लेस पर शांत और सम्मानजनक संवाद बेहद जरूरी है. वहीं कुछ लोगों का मानना था कि भारतीय और विदेशी क्लाइंट्स की तुलना को इतने व्यापक स्तर पर नहीं किया जा सकता, क्योंकि हर व्यक्ति और हर कल्चर की अपनी अलग कार्यशैली होती है.