तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और आधुनिक दौर के बीच हाड़ौती अंचल की सदियों पुरानी लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने की एक सराहनीय पहल कोटा की कला दीर्घा में देखने को मिल. यहां आयोजित 'लाड़ी बोहनी लोक पर्व' ने न केवल हाड़ौती की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दी, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी मजबूत संदेश दिया.
कार्यक्रम में महिलाओं, युवतियों और बालिकाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार आकर्षक गुड़ियाओं का निर्माण किया और उनका पारंपरिक श्रृंगार किया. रंग-बिरंगी वेशभूषा, लोक शैली की सजावट और पारंपरिक कलात्मक प्रस्तुति से सजी इन गुड़ियाओं में हाड़ौती की लोक संस्कृति की जीवंत झलक दिखाई दी. आयोजन स्थल पूरी तरह लोक रंगों में रंगा नजर आया.
हाड़ौती अंचल का प्राचीन लोक पर्व लाड़ी बोहनी बेटियों के प्रति स्नेह, परिवार की सुख-समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है. इस अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीतों की मधुर प्रस्तुतियां दीं और नई पीढ़ी को इस लोक पर्व के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व से भी अवगत कराया.
आयोजकों ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली और बदलते सामाजिक परिवेश के कारण लाड़ी बोहनी जैसी अनेक लोक परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही हैं. नई पीढ़ी इन लोक संस्कारों और परंपराओं से दूर होती जा रही है. ऐसे में इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन न केवल हमारी अमूल्य विरासत को संरक्षित करने का माध्यम बनते हैं, बल्कि समाज को अपनी लोक संस्कृति के प्रति जागरूक भी करते हैं.
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवतियों और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. गुड़िया निर्माण, पारंपरिक प्रस्तुतियों और लोक संस्कृति से जुड़े आयोजनों के माध्यम से हाड़ौती की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को सहेजने का संदेश दिया गया. आयोजन का उद्देश्य केवल एक लोक पर्व का उत्सव मनाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और विरासत से जोड़ना भी रहा.
हाड़ौती की पहचान माने जाने वाले इस लोक पर्व ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि यदि समय रहते अपनी लोक परंपराओं, लोक कला और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाले समय में ऐसी अनमोल विरासत केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित होकर रह जाएगी. ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.