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Gudi Padwa 2026: कब है मराठी नववर्ष का पर्व, जानें तिथि, महत्व और पूजा विधि

महाराष्ट्र और गोवा में मनाया जाने वाला गुड़ी पड़वा भी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है. यह त्योहार खासतौर पर कोंकणी और मराठी समुदाय के लोगों द्वारा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. गुड़ी पड़वा मराठी कैलेंडर के नए साल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इस दिन लोग घरों में विशेष पूजा करते हैं, गुड़ी स्थापित करते हैं और पारंपरिक व्यंजन बनाकर खुशियां मनाते हैं.

भारत में कई ऐसे त्योहार हैं जो नए साल की शुरुआत का प्रतीक माने जाते हैं. महाराष्ट्र और गोवा में मनाया जाने वाला गुड़ी पड़वा भी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है. यह त्योहार खासतौर पर कोंकणी और मराठी समुदाय के लोगों द्वारा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. गुड़ी पड़वा मराठी कैलेंडर के नए साल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इस दिन लोग घरों में विशेष पूजा करते हैं, गुड़ी स्थापित करते हैं और पारंपरिक व्यंजन बनाकर खुशियां मनाते हैं.

गुड़ी पड़वा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
गुड़ी पड़वा का त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र महीने के पहले दिन यानी शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. वर्ष 2026 में यह पर्व 19 मार्च को मनाया जाएगा. इसी दिन से मराठी शक संवत 1948 की शुरुआत होगी.

प्रतिपदा तिथि का समय इस प्रकार है:
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 19 मार्च 2026, सुबह 06:52 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त: 20 मार्च 2026, सुबह 04:52 बजे

कर्नाटक में इस दिन को युगादी, जबकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उगादी के रूप में मनाया जाता है. इन सभी त्योहारों का अर्थ नए साल की शुरुआत से जुड़ा हुआ है.

गुड़ी पड़वा का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान सूर्य ने सूर्य सिद्धांत नामक ग्रंथ का ज्ञान दिया था. वैदिक ज्योतिष के अनुसार गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया, विजयादशमी और बाली प्रतिपदा को मिलाकर साढ़े तीन मुहूर्त माने जाते हैं. इन दिनों में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करना अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्यों में सफलता और सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं. इसलिए कई लोग इस दिन घर, वाहन या अन्य जरूरी सामान भी खरीदते हैं.

गुड़ी पड़वा की पूजा विधि और परंपराएं
गुड़ी पड़वा के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और घर के मुख्य द्वार पर गुढ़ी स्थापित करते हैं. गुढ़ी को फूलों की माला, हल्दी, कुमकुम और अक्षत से सजाया जाता है. इसके बाद भगवान की पूजा, यज्ञ और हवन किए जाते हैं. इस दिन घरों को रंगोली और सजावट से सुंदर बनाया जाता है. पूजा के बाद प्रसाद के रूप में जीरा, चना और अन्य प्रसाद बांटा जाता है.

पारंपरिक व्यंजनों के साथ मनाया जाता है त्योहार
गुड़ी पड़वा के अवसर पर महाराष्ट्र में कई पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं. इनमें श्रीखंड, पुरण पोली, राइस चकली और भाकरवड़ी खास तौर पर शामिल हैं. परिवार और रिश्तेदारों के साथ इन स्वादिष्ट पकवानों का आनंद लेकर लोग नए साल का स्वागत करते हैं.

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