Unique Example of Communal Harmony
Unique Example of Communal Harmony
समाज में जब नफरत की दीवारें खड़ी करने की कोशिशें होती हैं, तब आपसी प्रेम, सम्मान और भाईचारे की छोटी-सी पहल भी उम्मीद की बड़ी किरण बन जाती है. ऐसा ही एक खूबसूरत उदाहरण बिजनौर जिले के धामपुर क्षेत्र के गांव मोहड़ा में देखने को मिला, जहां एक मुस्लिम महिला के निधन पर गांव में शुरू होने जा रही रामलीला का मंचन एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया. गांव के इस फैसले ने सांप्रदायिक सौहार्द, सामाजिक एकता और इंसानियत की उस परंपरा को सामने रखा, जिसमें धर्म से पहले रिश्तों और संवेदनाओं को महत्व दिया जाता है.
आयोजन के बीच हुआ गफूरन बी का इंतकाल
दरअसल, गांव मोहड़ा में रामलीला का मंचन शुरू होने जा रहा था. आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी थीं और ग्रामीणों में उत्साह का माहौल था. इसी बीच गांव की रहने वाली गफूरन बी का इंतकाल हो गया. उनके निधन की खबर से गांव में शोक की लहर दौड़ गई. गफूरन बी को गांव के लोग केवल एक मुस्लिम महिला के रूप में नहीं, बल्कि अपने परिवार की सदस्य की तरह सम्मान देते थे. उनके जाने का दुख पूरे गांव ने साझा किया.
रामलीला का कार्यक्रम एक दिन के लिए टाला गया
गफूरन बी के निधन के बाद ग्रामीणों ने महसूस किया कि एक ओर गांव में शोक का माहौल है, वहीं दूसरी ओर रामलीला का मंचन कर उत्सव मनाना उचित नहीं होगा. इसके बाद आपसी सहमति से रामलीला का कार्यक्रम एक दिन के लिए टाल दिया गया. यह फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि गांव की आपसी आत्मीयता और दिवंगत महिला के प्रति सम्मान की भावना से लिया गया.
गांव के प्रधान ने क्या कुछ कहा
गांव के ग्राम प्रधान ऋषि कुमार ने इस फैसले के पीछे की भावना को साझा करते हुए कहा कि गफूरन बी उनके लिए बुआ जैसी थीं और गांव के लोग भी उन्हें इसी नजर से देखते थे. उन्होंने कहा, 'कैसे दिल करता कि एक तरफ हमारी बुआ समान गफूरन बी की मय्यत पड़ी हो और उधर रामलीला का मंचन हो रहा हो. उनके निधन से गांव में दुख का माहौल था. इसलिए हमने एक दिन के लिए कार्यक्रम टाल दिया.'
मोहड़ा के ग्रामीणों ने इसी भावना को अपने व्यवहार में उतारकर एक मिसाल पेश की. भारत की सांस्कृतिक पहचान उसकी विविधता और आपसी भाईचारे में बसती है. यहां अलग-अलग धर्मों, परंपराओं और मान्यताओं को मानने वाले लोग सदियों से साथ रहते आए हैं. गांव मोहड़ा की यह घटना इसी साझा विरासत की याद दिलाती है. रामलीला हिंदू समाज की आस्था और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा आयोजन है, जबकि गफूरन बी मुस्लिम समुदाय से थीं. इसके बावजूद उनके निधन पर रामलीला स्थगित करने का निर्णय यह बताता है कि मानवीय रिश्तों की कोई धार्मिक सीमा नहीं होती.
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