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Mauni Amavasya: मौनी अमावस्या के मौके पर रविवार को होगा महास्नान, 64 घाट किए गए तैयार.. करीब 4 करोड़ श्रद्धालु करेंगे स्नान

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. मौनी अमावस्या पर 4 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान की संभावना के बीच प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं.

मौनी अमाव्सया के लिए जुट रही भीड़ (PTI) मौनी अमाव्सया के लिए जुट रही भीड़ (PTI)

प्रयागराज में माघ मेले का आयोजन इस बार भव्यता और आस्था का प्रतीक बन गया है. 44 दिनों तक चलने वाले इस मेले में लाखों श्रद्धालु संगम तट पर स्नान और साधना के लिए जुटे हुए हैं. मौनी अमावस्या पर 4 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान की संभावना के बीच प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं. 

माघ मेले का आयोजन 3 जनवरी से शुरू हुआ और अब तक पौष पूर्णिमा और मकर संक्रांति के महास्नान संपन्न हो चुके हैं. रविवार को मौनी अमावस्या के अवसर पर तीसरा महास्नान होगा, जिसे सबसे प्रमुख माना जाता है. प्रशासन ने अनुमान लगाया है कि इस दिन 3 से 4 करोड़ श्रद्धालु संगम तट पर स्नान करेंगे. 

सुरक्षा और व्यवस्थाएं

850 हेक्टेयर में फैले मेले क्षेत्र में 64 घाट बनाए गए हैं, जहां श्रद्धालु स्नान कर सकते हैं. संगम नोस, त्रिवेणी संगम का मुख्य घाट, सबसे अधिक श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए हेलीकॉप्टर और ड्रोन से निगरानी की व्यवस्था की है.

प्रशासन ने सुरक्षा के लिए यूपी पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जल पुलिस और अन्य बलों को तैनात किया है. संगम क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित कर दिया गया है, और नावों के संचालन पर रोक लगा दी गई है. जल पुलिस और गोताखोरों की टीम घाटों पर तैनात है. श्रद्धालुओं को गाइड करने के लिए वॉलंटियर्स भी मौजूद हैं.

आस्था और भक्ति का संगम
माघ मेले में आस्था और भक्ति के अद्भुत रंग देखने को मिल रहे हैं. मां गंगा की आरती में हर वर्ग के लोग भाग ले रहे हैं. दीपदान और गंगा आरती की भव्यता ने मेले को और आकर्षक बना दिया है. अजब-गजब बाबाओं के अनूठे रूप और साधना भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं. मौनी बाबा की चक्रवर्ती दंडवत परिक्रमा और कांटों वाले बाबा की कठिन तपस्या ने मेले में विशेष आकर्षण पैदा किया है.

युवाओं की बढ़ती भागीदारी
इस बार माघ मेले में युवाओं की भागीदारी बढ़ती नजर आ रही है. युवा बड़ी संख्या में धार्मिक स्थलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं. यह सनातन धर्म की मजबूती और संस्कारों के प्रति उनकी आस्था को दर्शाता है.

माघ मेले को इस बार मिनी कुंभ के रूप में देखा जा रहा है. आस्था, अध्यात्म और परंपरा का यह संगम हर वर्ग के लोगों को जोड़ रहा है. प्रशासन ने मेले को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया है. श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे भीड़भाड़ से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें.