शहद के चमत्कारी प्रयोग
शहद के चमत्कारी प्रयोग
शहद सिर्फ खाने की चीज नहीं है. इसका इस्तेमाल पुराने समय से पूजा-पाठ और आयुर्वेद में भी किया जाता रहा है. यह मधुमक्खियों से मिलने वाला नेचुरल और मीठा पदार्थ है. धार्मिक मान्यताओं में शहद को काफी खास माना गया है. पंचामृत बनाने में भी शहद का इस्तेमाल किया जाता है. ज्योतिष में शहद का संबंध मुख्य रूप से बृहस्पति से माना जाता है. इसके साथ सूर्य और मंगल का संबंध भी बताया जाता है.
शहद का इस्तेमाल हमेशा सीमित मात्रा में करना चाहिए. ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं में इसे पानी के साथ लेने की बात कही जाती है. सुबह के समय शहद का सेवन अच्छा माना जाता है. शहद को गर्म करके खाने से बचने की सलाह दी जाती है. इसे तेल, मांस, मछली, गुड़ जैसी चीजों के साथ लेने से भी बचना चाहिए. जिन लोगों को शहद से एलर्जी या कोई स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.
धार्मिक मान्यता के अनुसार पंचामृत में शहद मिलाकर पूजा में इस्तेमाल किया जाता है. भगवान शिव को शहद अर्पित करने की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है. मान्यता है कि इससे मंगल से जुड़ी परेशानियां कम होती हैं और कर्ज से राहत मिल सकती है. देवी को शहद अर्पित करने से विरोधियों से जुड़ी परेशानी दूर होने की मान्यता है.
आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों में शहद का इस्तेमाल लंबे समय से होता आया है. गले की परेशानी में इसे तुलसी या अदरक के साथ लेने की परंपरा है. कुछ लोग वजन कम करने के लिए गुनगुने पानी के साथ शहद लेते हैं. हालांकि, किसी बीमारी का इलाज केवल शहद के भरोसे नहीं करना चाहिए.
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार अगर मंगल अशुभ फल दे रहा हो तो शहद खाने के बजाय मंगलवार को शिवलिंग पर चढ़ाने का उपाय बताया जाता है. बृहस्पति से जुड़ी परेशानी में शहद को पीतल या सोने के पात्र में रखने या सेवन करने की मान्यता है.
पति-पत्नी के रिश्ते में तालमेल के लिए कांच की बोतल में शहद भरकर बेडरूम में रखने का उपाय भी बताया जाता है. वहीं, किसी व्यक्ति को गलत रास्ते से सही दिशा में लाने के लिए शनिवार को शहद से भरी कांच की शीशी जमीन में दबाने की मान्यता है.