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Vivah Muhurat 2022 नवंबर और दिसंबर में सिर्फ नौ दिन बजेगी शहनाई, आइए जानते हैं कब-कब है शादी के लिए शुभ मुहूर्त

31 अक्टूबर को छठ पूजा के साथ ही इस साल के हिन्दू के सभी बड़े पर्व-त्योहार अब संपन्न हो चुके हैं. हिंदी कैलेंडर के अनुसार यह कार्तिक का महीना है. मान्यता है कि इस महीने की एकादशी या कहे देवउठनी एकादशी तिथि को विष्णु भगवान चार महीने के बाद योगनिद्रा से जाग जाते हैं. इसके बाद शादी-विवाह समेत सभी प्रकार के शुभ-मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं. इस बार नवंबर और दिसंबर में शादी की शहनाई सिर्फ नौ दिन बजेगी.

नवंबर और दिसंबर में शादी. नवंबर और दिसंबर में शादी.
हाइलाइट्स
  • देवउठनी एकादशी को विष्णु भगवान चार महीने के बाद योगनिद्रा से जाग जाते हैं

  • इसके बाद शादी-विवाह समेत सभी प्रकार के शुभ-मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं

31 अक्टूबर को छठ पूजा के साथ ही इस साल के हिन्दू के सभी बड़े पर्व-त्योहार अब संपन्न हो चुके हैं. हिंदी कैलेंडर के अनुसार यह कार्तिक का महीना है. मान्यता है कि इस महीने की एकादशी या कहे देवउठनी एकादशी तिथि को विष्णु भगवान चार महीने के बाद योगनिद्रा से जाग जाते हैं. इसके बाद शादी-विवाह समेत सभी प्रकार के शुभ-मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं. इस बार नवंबर और दिसंबर में शादी की शहनाई सिर्फ नौ दिन बजेगी.

इस बार देवउठनी एकदशी पर शादी-विवाह का मुहूर्त नहीं 
इस वर्ष देवउठनी एकदशी पर शादी-विवाह का मुहूर्त नहीं है. पंडितों का कहना है कि इसबार देवउठनी एकादशी के दिन भगवान सूर्य की स्थिति अच्छी नहीं रहेगी. इस वजह से इस दिन शादी-विवाह संपन्न नहीं होगा. पंडितों का कहना है कि इस दिन वृश्चिक राशि में भगवान सूर्य मौजूद नहीं रहेंगे, इसलिए इस दिन शादी-विवाह ही नहीं, कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए.

नवंबर में शादी के शुभ मुहूर्त
सोमवार - 21 नवंबर 2022
गुरुवार - 24 नवंबर 2022
शुक्रवार - 25 नवंबर 2022
रविवार - 27 नवंबर 2022

दिसंबर में विवाह के शुभ मुहूर्त
शुक्रवार - 02 दिसंबर 2022
बुधवार - 07 दिसंबर 2022
गुरुवार - 08 दिसंबर 2022
शुक्रवार - 09 दिसंबर 2022
बुधवार - 14 दिसंबर 2022

देवउठनी एकादशी पर क्यों करते हैं शुभ कार्य
कार्तिक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान, देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है. यह एकादशी दीपावली के बाद आती है. आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु शयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन उठते हैं, इसीलिए इसे  देवउठनी एकादशी कहा जाता है.भगवान विष्णु के शयनकाल के चार माह में विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं, इसीलिए देवउठनी एकादशी पर श्री हरि के जागने के बाद शुभ तथा मांगलिक कार्य शुरू होते हैं.