Saraswati Puja
Saraswati Puja
बसंत पंचमी का त्योहार ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. यह पावन दिवस ऋतु-परिवर्तन का प्रतीक भी है और जीवन में सुख, बुद्धि और समृद्धि की प्राप्ति का शुभ अवसर भी. जो लोग इस अवसर पर मां सरस्वती की मूर्ति बैठाते हैं, उनके वहां देवी को विदाई देने का विधान भी खास होता है. लेकिन इस विधान में कुछ को ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है. अगर आप भूलकर भी इन चीजों को करते हैं, तो आपके ऊपर इनका बुरा असर पड़ सकता है.
1. न पहने काले रंग के कपड़े
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को पीला और साफ-सफेद वस्त्र अत्यंत प्रिय होता है. काले रंग के कपड़े पहनना शुभ नहीं माना जाता है क्योंकि यह रंग ऊर्जा और ज्ञान के साथ मेल नहीं खाता. इसलिए मां की विदाई या पूजा में काले वस्त्र पहनने से बचें और पीले वस्त्र का प्रयोग करें, जिससे शुभ ऊर्जा बनी रहे.
2. पौधों को काटना या नुकसान पहुंचाना
इस दिन बसंती ऋतु की शुरुआत होती है और धरती पर फूल खिलते हैं. इसलिए पेड़ों या पौधों को काटना या नुकसान पहुंचाना अशुभ माना जाता है. ऐसा करने से मां सरस्वती नाराज हो सकती हैं और इसका नकारात्मक असर हमारी गतिविधियों पर पड़ सकता है. इन दिनों में शुद्ध भावना से प्रकृति का सम्मान करना चाहिए.
3. पूजा के समय गलत व्यवहार
विद्या की देवी मां सरस्वती सौम्य स्वभाव की हैं. पूजा के समय नाराजगी, दौड़-धूप, झगड़ा, गाली-गलौज या अशांति जैसी गतिविधियां करना भी वर्जित है. इससे मां नाराज होती हैं. पूजा एक पवित्र कर्म है और इसे शांतिपूर्ण मन से संपन्न करना चाहिए. ऐसा न करने से विद्या, बुद्धि और एकाग्रता में बाधा आ सकती है.
4. अनियंत्रित स्नान या जल्दी-बाजी में पूजा करना
बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को विदाई देने से पहले स्नान, वस्त्र और पूजा-स्थान की सफाई का ध्यान रखना चाहिए. जल्दबाजी में पूजा या बिना मन के पूजा करना शुभ परिणाम नहीं देता. स्नान तथा पूजा के बाद स्थान की शुद्धता-स्वच्छता रखना आवश्यक है.
5. नकारात्मक भाव से विदाई देना
मां सरस्वती को विदाई देते समय निराशा, अनादर, आलस्य या नकारात्मक सोच रखना अशुभ माना जाता. यह दिन सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान की शुरुआत और नई उमंगों का प्रतीक है. इसलिए विदाई के समय अच्छे विचार, आभार और सत्कार के भाव रखने चाहिए.
ये भी पढ़ें