Godhan Puja 2026
Godhan Puja 2026
गोधन पूजा भाई-बहन के प्यार को समर्पित एक खास त्योहार है. इस दिन बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में गोधन कूटने कर भाई दूज मनाई जाती है. इस दिन बहनें गोबर से गोधन की आकृति बनाती हैं और उसकी पूजा करने के बाद मूसल से कूटती हैं. इस दौरान भाई की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना की जाती है. गांवों में यह रस्म घर के आंगन या किसी खुले स्थान पर आसानी से निभा ली जाती है, लेकिन शहरों में रहने वालों के लिए जगह की कमी के कारण दिक्कत होती है या फिर रस्म छूट जाती है. फ्लैट में न तो बड़ा आंगन होता है और न ही शहर में आसानी से गोबर मिलता है. ऐसे में सवाल उठता है कि शहर में रहने वाली बहनें आखिर गोधन कैसे कूटें? इसके लिए कुछ आसान तरीके आप अपना सकती हैं.
ऑनलाइन गोयठा मंगवाकर तैयार करें गोधन
शहर में गोबर मिलना मुश्किल है, लेकिन इसका एक आसान उपाय गोयठा हो सकता है. आप ऑनलाइन या आसपास की दुकान से सूखे गोयठे खरीदकर ले आएं. फिर इन्हें रातभर पानी में भिगोकर रख दें. अगले दिन जब ये नरम हो जाएं, तो इन्हें अच्छी तरह मसलकर गोबर जैसा तैयार कर लें. जरूरत के हिसाब से छोटी-सी गोधन बना सकती हैं. इसके लिए बहुत ज्यादा जगह की जरूरत भी नहीं पड़ेगी.
मिट्टी से भी बना सकती हैं गोधन
अगर गोयठा उपलब्ध नहीं है या आप फ्लैट में गोबर का इस्तेमाल नहीं करना चाहती हैं, तो मिट्टी से भी गोधन की आकृति बना सकती हैं. इसके लिए साफ मिट्टी में थोड़ा पानी मिलाकर उसे गूंथ लें और छोटी-सी आकृति तैयार कर लें. केवल रस्म के लिए इसमें थोड़ा सा गोबर मिला लें, जिससे गोधन का महत्व भी बना रहे.
गोधन कूटने का क्या है महत्व?
गोधन कूटने की परंपरा भाई-बहन के रिश्ते और बहन की मंगलकामना से जुड़ी है. मान्यता है कि इस दिन बहनें गोधन की पूजा और उसे कूटने की रस्म निभाकर अपने भाई की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की प्रार्थना करती हैं. यह त्योहार भाई-बहन के बीच स्नेह और अपनापन जताने का भी एक खास मौका होता है.
गोधन पूजा के लिए क्या-क्या चाहिए?
गोधन कूटने के लिए गोबर, मूसल, आटे और हल्दी क मिश्रण, रोली, अक्षत, कांटा, फूल, दीपक, रूई, धूप-बत्ती, बजरी, और पूजा में चढ़ाने के लिए मिठाई या प्रसाद रखें. इस तरह शहर में रहने वाली बहनें भी अपनी सुविधा और परिवार की परंपरा के अनुसार गोधन की रस्म निभा सकती हैं.
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