Chaitra Navratri 2026
Chaitra Navratri 2026
हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है. साल में चार बार आने वाली नवरात्रि में चैत्र नवरात्रि सबसे प्रमुख मानी जाती है. यह मां दुर्गा की उपासना का पवित्र पर्व है, जिसमें नौ दिनों तक देवी के अलग अलग रूपों की पूजा की जाती है.
इस दिन से शुरू हो रही है नवरात्रि
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च को होगी. इस दिन सुबह 6 बजकर 52 मिनट से प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी और 20 मार्च सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार 19 मार्च को ही नवरात्रि का पहला दिन माना जाएगा और इसी दिन से घटस्थापना या कलश स्थापना की जाएगी.
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है. साल 2026 में कलश स्थापना के लिए पहला शुभ मुहूर्त सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक रहेगा. इसके अलावा दोपहर में भी एक शुभ समय है, जो 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा. मान्यता है कि सही मुहूर्त में कलश स्थापना करने से घर में सुख समृद्धि आती है और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है.
कलश स्थापना की विधि
कलश स्थापना के लिए सबसे पहले घर के मंदिर या साफ स्थान पर मिट्टी से वेदी बनाएं. उसमें जौ बोएं और उसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित करें. कलश के ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें. इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान कर विधि विधान से पूजा करें. दीपक जलाएं और पूरे श्रद्धा भाव से आरती करें.
नौ दिनों में देवी के अलग अलग रूपों की पूजा
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है. हर दिन की पूजा का अपना अलग महत्व होता है और भक्त पूरी श्रद्धा से व्रत रखते हैं.
अष्टमी तिथि और पूजा का समय
चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि 26 मार्च 2026 को मनाई जाएगी. अष्टमी तिथि 25 मार्च दोपहर 1:50 बजे से शुरू होकर 26 मार्च सुबह 11:48 बजे तक रहेगी.
पूजा के लिए सुबह 6:20 से 7:52 तक पहला शुभ मुहूर्त है. दूसरा मुहूर्त सुबह 10:56 से दोपहर 2:01 तक रहेगा, जबकि शाम का शुभ समय 5:06 से 9:33 बजे तक है.
कन्या पूजन का शुभ समय
अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. 26 मार्च को सुबह 6:18 से 7:50 तक पहला मुहूर्त रहेगा. इसके अलावा 10:55 बजे से 1:59 बजे तक दूसरा शुभ समय है. इस दौरान कन्याओं को भोजन करवाना और उनका सम्मान करना बेहद शुभ माना जाता है.
अष्टमी का धार्मिक महत्व
नवरात्रि की आठवीं तिथि को महाअष्टमी कहा जाता है. इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. मान्यता है कि उनकी आराधना से जीवन के दुख दर्द और पाप दूर होते हैं. कन्या पूजन को भी इस दिन विशेष महत्व दिया जाता है. कहा जाता है कि कुंवारी कन्याओं को भोजन कराने से घर में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य बना रहता है.