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Chaitra Navratri 2026 7th Day Maa Kalratri: चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि का पूजन, देवी को प्रसन्न करने के लिए जानें पूजा विधि, प्रिय भोग और मंत्र समेत हर जानकारी

Navratri 7th Day Maa Kalratri: चैत्र नवरात्रि का आज सातवां दिन है. इस दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. आप यहां जान सकते हैं मां कालरात्रि की पूजा विधि, मंत्र और देवी की उत्पत्ति की कथा.

Maa Kalratri Maa Kalratri

Maa Kalratri: चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन 25 अप्रैल 2026 को है. इस दिन दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. मां कालरात्रि को महायोगीश्वरी, महायोगिनी और शुभंकरी भी कहा जाता है. मां कालरात्रि को मां दुर्गा का सबसे उग्र रूप माना जाता है. 

ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को हर भय और परेशानी से मुक्ति मिल जाती है. शत्रु और विरोधियों पर विजय मिलती है. मां कालरात्रि की पूजा से शनि ग्रह संबंधी बाधाएं भी दूर हो जाती है. मां कालरात्रि को अज्ञानता को नष्ट करने और ब्रह्मांड से अंधकार को दूर करने के लिए जाना जाता है. मां कालरात्रि की पूजा से निगेटिव शक्तियों का नाश होता जाता है. आप यहां मां कालरात्रि को प्रसन्न करने के लिए पूजा विधि, प्रिय भोग और मंत्र समेत हर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

मां कालरात्रि का ऐसा है स्वरूप 
मां कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत भयानक है. मां का शरीर अंधकार की तरह काला है. मां के बाल लंबे और बिखरे हुए हैं. मां के गले में माला है जो बिजली की तरह चमकती रहती है. मां कालरात्रि के चार हाथ हैं. मां कालरात्रि का ऊपर का दाहिना हाथ वर मुद्रा में और नीचे का हाथ अभयमुद्रा में रहता है, जबकि बायीं ओर के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा और निचले हाथ में खड़ग है. मां ने दैत्यों का संहार करने के लिए अपनी त्वचा के रंग का त्याग किया था. मां कालरात्रि का वाहन गधा है.

मां कालरात्रि की पूजा विधि 
1. चैत्र नवरात्रि सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा करने के लिए सुबह जल्द जगना चाहिए. 
2. इसके बाद स्नान करके साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए.नीले रंग का कपड़ा पहने. आप इसके अलावा ग्रे रंग के वस्त्र भी पहन सकते हैं.
3. मां कालरात्रि की पूजा सुबह और रात दोनों समय की जाती है लेकिन रात्रि के समय पूजा करना शुभ माना जाता है.
4. मां कालरात्रि के सामने घी का दीपक जलाएं, लाल फूल अर्पित करें और गुड़ का भोग लगाएं. मां कालरात्रि को लाल गुड़हल, लाल गुलाब और रातरानी का फूल चढ़ाएं.
5. मां कालरात्रि को मिठाई, पंच मेवा और 5 प्रकार का फल अर्पित करना चाहिए.
6. माता कालरात्रि को रोली कुमकुम लगाना चाहिए.
7. माता कालरात्रि की पूजा के दौरान माता के मंत्रों का जाप जरूर करें. 
8. मां कालरात्रि की पूजा के बाद अंत में आरती जरूर करें. 

मां कालरात्रि को लगाएं ये भोग
मां कालरात्रि को गुड़ बहुत प्रिय है. आप चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी चीजों का भोग जरूर लगाएं. मालपुआ भी मां को बेहद पसंद है. महासप्तमी की पूजा में भोग के लिए मालपुआ जरूर बनाएं. गुड़ से बना हलवा, चावल-गुड़ की खीर माता रानी को अर्पित करें. मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. इसके साथ ही घर में खुशहाली आती है. 

इन मंत्रों का करें जाप
1. जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि। जय सार्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥ 
2. या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
3. एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा। वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
4. ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

शत्रु और विरोधियों पर विजय प्राप्त करने के लिए ऐसे करें पूजा
चैत्र नवरात्रि का सातवें दिन शत्रु और विरोधियों पर विजय प्राप्त करने के लिए सफेद या लाल वस्त्र धारण करके रात के समय में मां कालरात्रि की पूजा करें. मां कालरात्रि के सामने एक घी का दीपक जलाएं और माता को गुड़ का भोग लगाएं. इसके बाद 108 बार नवार मंत्र 'एंग रिंग क्लीन चामुंडाई विच्चे' का जाप करें और एक-एक करके लौंग अर्पित करें. पूजा समाप्त होने के बाद 108 लौंग को अग्नि में डाल दें. इससे शत्रु और विरोधी शांत होंगे और उनकी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा.

मां कालरात्रि की उत्पत्ति से जुड़ी कथा
राक्षस शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा रखा था. इससे सभी देवी-देवता चिंतित थे. सभी देवी-देवता मिलकर भगवान शंकर के पास गए और रक्षा की प्रार्थना की. तब महादेव ने मां पार्वती से असुरों का अंत कर अपने भक्तों की रक्षा करने को कहा. इसके बाद माता पार्वती ने दुर्गा का रूप धारण किया और शुंभ-निशुंभ का वध कर दिया. माता के सामने असली चुनौती राक्षस रक्तबीज ने पेश की. जैसे ही मां दुर्गा रक्तबीज को मारती और उसका खून धरती पर गिरता. उससे लाखों रक्तबीज पैदा हो जाते. इससे माता क्रोधित हो गई और उनका वर्ण श्यामल हो गया. इसी स्वरूप से मां कालरात्रि का प्राकट्य हुआ. मां कालरात्रि रक्तबीज का वध करती और उसके शरीर से निकलने वाले रक्त को धरती पर गिरने से पहले ही पी जातीं. इस तरह से माता ने सभी राक्षसों का वध किया और धरती की रक्षा की.