scorecardresearch

Jyotirlinga Controversey: छठे ज्योतिर्लिंग पर महाराष्ट्र-असम सरकार में टकराव, जानिए क्या है पूरा मामला और भारत में कहां-कहां मौजूद है ज्योतिर्लिंग

देश में छठे ज्योतिर्लिंग पर विवाद शुरू हो गया है. असम के मुख्यमंत्री ने विज्ञापन के जरिए दावा किया है कि छठा ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर असम में है. लेकिन महाराष्ट्र दावा कर रहा है कि पुराणों में भीमाशंकर का जिक्र भीमा नदी के किनारे है. जो कि महाराष्ट्र में ही, इस सियासी लड़ाई के बीच में ये जानना जरूरी है कि 12 ज्योतिर्लिंगों में से छठे ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर का क्या महत्व है.

छठे ज्योतिर्लिंग पर महाराष्ट्र-असम सरकार में टकराव छठे ज्योतिर्लिंग पर महाराष्ट्र-असम सरकार में टकराव
हाइलाइट्स
  • देशभर में हैं 12 ज्योतिर्लिंग

  • असम ने किया छठें ज्योतिर्लिंग पर दावा

हर दिशा में स्थापित 12 ज्योतिर्लिंग भारत को एक आध्यात्मिक डोर में बांधते हैं. इन्हीं में से एक है भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग, जो महाराष्ट्र में स्थित है. पुणे के सह्याद्री इलाके में स्थित भीमाशंकर मंदिर का वर्णन शिवपुराण में मिलता है..इसके अलावा भगवान शंकर के भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का संबंध त्रेता युग के रामायण काल से भी मिलता है. पौराणिक कथा कहती है कि रावण के भाई कुंभकर्ण की पत्नी कर्कटी के गर्भ से भीमा नामक एक राक्षस का जन्म हुआ. उसने भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त कर देवताओं को सताना शुरु कर दिया. जिसके बाद पीड़ित देवता भगवान शिव की शरण में पहुंचे. तब भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और भीमा का वध कर दिया. इसके बाद यह ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रसिद्ध हुआ.

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की मान्यता
मान्यताओं के मुताबिक पुणे में भीम नाम के राक्षस को खत्म करने के बाद भगवान शंकर यहां मोटेश्वर महादेव के तौर पर विराजमान हुए. इस मंदिर को लेकर पुरुषों में ऐसी मान्यता है कि यहां जो भी भक्त सूर्य की पहली किरण के साथ इस मंदिर के दर्शन करता है और 12 ज्योतिर्लिंगों का नाम जपता है उसके सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि सावन के महीने में इस ज्योतिर्लिंग का नाम लेने से भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं

भगवान शिव का ये ज्योतिर्लिंग पुणे से 120 किलोमीटर दूरी पर घने जंगलों में बना है. मान्यता है कि भीमाशंकर मंदिर 1200 साल पुराना है. भीमाशंकर मंदिर के शिखर का निर्माण कई प्रकार के पत्थरों से किया गया है. पुरातत्त्वविद् मानते हैं कि ये मंदिर नागर शैली में बनाया गया है. नागर शैली उत्तर भारतीय हिन्दू स्थापत्य कला की तीन में से एक शैली है. इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग काफी बड़ा और मोटा है, जिसके कारण इस मंदिर को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है. महाराष्ट्र का भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की मान्यता है कि यहां की गई पूजा और अभिषेक कभी निष्फल नहीं जाता. इस दरबार से कभी कोई शिव भक्त निराश नहीं लौटता. क्योंकि यहां अपने भक्त की रक्षा के लिए खुद महादेव प्रकट हुए थे.

छठे ज्योतिर्लिंग को लेकर क्या है विवाद?
लेकिन इस भव्य भगवान शंकर के इस छठे ज्योतिर्लिंग को लेकर विवाद शुरू हो गया है. जिसके पीछे असम सरकार का ये विज्ञापन है. जिसमें छठे ज्योतिर्लिंग के असम में होने का दावा किया गया है. असम सरकार का दावा है कि छठा ज्योतिर्लिंग असम के कामरूप में दाकिनी हिल्स पर है. लेकिन जाहिर है ये दावा महाराष्ट्र को मंजूर नहीं. 

ज्योतिर्लिंग क्या है?
ऐसा माना जाता है कि जहां- जहां महादेव स्वयं प्रकट हुए वहां दिव्य ज्योतिर्लिंग बना है. भगवान शिव की पूजा सबसे ज्यादा उनके लिंग स्वरूप में होती है. ऐसा माना जाता है कि इस लिंग रूप में भगवान ज्योति के रूप में विद्यमान रहते हैं, जिसे ज्योतिर्लिंग कहते हैं. पुराणों में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग बताए गए हैं. 

कहां कहां है ज्योतिर्लिंग ? 

  • ऐसा माना जाता है कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग धरती का पहला ज्योतिर्लिंग है कहते हैं सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को खुद चंद्रदेव ने स्थापित किया था.  
  • इसके बाद नंबर 2 पर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग है, जो आंध्र प्रदेश के कृष्णा नदी के तट पर स्थित है. शास्त्रों में मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को कैलाश पर्वत के समान बताया गया है.
  • वहीं तीसरे नंबर पर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में स्थित है. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग ऐसा एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिण मुखी है  मान्यता है कि महाकालेश्वर की पूजा से आयु बढ़ती है और संकट टलते हैं. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की भस्मारती में शामिल होने दूर दूर से लोग पहुंचते हैं.
  • वहीं इंदौर में नर्मदा के तट पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का अपना एक खास महत्व है. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग जिस स्थान पर मौजूद है वहां नर्मदा ऊं का आकार बनाती है.
  • केदारनाथ में मौजूद ज्योतिर्लिंग शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में एक माना जाता है. 3584 मीटर ऊंचाई पर मौजूद केदारनाथ धाम भगवान शिव को सबसे ज्यादा पसंद है.
  • इसके बाद पुणे में सहस्त्रादि पर्वत पर मौजूद छठे भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का भी अपना खास महत्व है. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को लेकर मान्यता यहां दर्शन से सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं.
  • 12 ज्योतिर्लिंगों में काशी विश्वनाथ का अपना ही खास आध्यात्मिक महत्व माना गया है. शास्त्रों में कहा गया है कि काशी विश्वनाथ ऐसा तीर्थ है जो प्रलय के बाद भी बचा रहेगा. मान्यता है प्रलय के वक्त खुद शिव काशी विश्वनाथ को त्रिशूल पर धारण कर लेंगे.
  • 12 ज्योतिर्लिंगों में एक त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक जिले में मौजूद है. कहते हैं शिव के गौतम ऋषि और गोदावरी के कहने पर त्र्यंबकेश्वर का रूप धारण किया.
  • ज्योतिर्लिंगों में नौवें नंबर पर आने वाला बैद्यनाथ झारखंड के दुमका जिले में मौजूद है.
  • द्वारका में स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की गिनती भी आस्था के बड़े केंद्रों में की जाती है.
  • रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंग में एक होने के साथ साथ चार धामों में एक है. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग को प्रभु राम ने स्थापित किया था जिसके चलते इसका नाम रामेश्वरम पड़ा. 
  • महाराष्ट्र के संभाजीनगर में मौजूद घृष्णेश्वर मंदिर को 12 वां ज्योतिर्लिंग माना जाता है.