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Akshardham Temple: कौन थे नीलकंठ वर्णी, अक्षरधाम मंदिर में 108 फीट ऊंची प्रतिमा की हुई प्राण प्रतिष्ठा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर में भगवान स्वामीनारायण के किशोर योगी स्वरूप नीलकंठ वर्णी की विशाल प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा कर दी गई है. भगवान स्वामीनारायण का बाल्यकाल का स्वरूप नीलकंठ वर्णी त्याग, तपस्या और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक माना जाता है. 

Neelkanth Varni at the Akshardham Temple (Photo:PTI)  Neelkanth Varni at the Akshardham Temple (Photo:PTI) 

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर में भव्य धार्मिक आयोजन के बीच भगवान स्वामीनारायण के किशोर योगी स्वरूप नीलकंठ वर्णी की विशाल प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई. धार्मिक अनुष्ठानों और वेदमंत्रों के बीच स्थापित की गई यह प्रतिमा करीब 108 फीट ऊंची है, जो अपनी सुनहरी आभा और भव्यता के कारण दूर से ही लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है. दोनों हाथ ऊपर उठाए और एक पैर पर खड़ी योग मुद्रा में यह प्रतिमा अक्षरधाम फ्लाईओवर से गुजरने वाले लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गई है.

नारायण स्वामी मंदिर में भव्य अनुष्ठान
अक्षरधाम परिसर स्थित नारायण स्वामी मंदिर में इस अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. संतों की मौजूदगी में पूरे विधि-विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया. पूरे परिसर में वेदमंत्रों की गूंज, यज्ञ और पूजा-अर्चना का माहौल बना रहा. इस धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया.

कौन थे नीलकंठ वर्णी
भगवान स्वामीनारायण का बाल्यकाल का स्वरूप नीलकंठ वर्णी त्याग, तपस्या और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक माना जाता है. कम उम्र में ही उन्होंने कठिन परिस्थितियों में लंबी यात्रा की और अपने लक्ष्य से कभी विचलित नहीं हुए. उनका जीवन यह संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प, विश्वास और सही सोच के साथ जीवन में हर चुनौती को पार किया जा सकता है. इसी कारण विशेष रूप से युवाओं के लिए नीलकंठ वर्णी का जीवन एक प्रेरणा स्रोत माना जाता है.

स्थापना का उद्देश्य और धार्मिक महत्व
मंदिर में नीलकंठ वर्णी की प्रतिमा की स्थापना का उद्देश्य श्रद्धालुओं को नीलकंठ वर्णी के आदर्शों और जीवन मूल्यों से जोड़ना है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा के बाद मूर्ति में दिव्यता का वास होता है, जिससे भक्तों को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक संतुलन की अनुभूति होती है. 

आस्था के साथ नया आकर्षण 
अक्षरधाम फ्लाईओवर से गुजरते समय यह विशाल सुनहरी प्रतिमा अब हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है. यह न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बन रही है, बल्कि दिल्ली के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में भी अपनी खास पहचान बना रही है, जहां भव्यता और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.

(सुशांत मेहरा की रिपोर्ट)