
Deru Mata Temple
Deru Mata Temple
चिकित्सा विज्ञान के आधुनिक दौर में भी आस्था की ताकत लोगों को सदियों पुराने धार्मिक स्थलों तक खींच लाती है. कोटा शहर से करीब 17 किलोमीटर और कैथून कस्बे से लगभग 4 किलोमीटर दूर स्थित डेरू माता मंदिर, जिसे जाखोड़ा माता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, आज भी हजारों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. हाड़ौती अंचल के इस प्राचीन मंदिर में लोग केवल दर्शन के लिए ही नहीं, बल्कि अपने शारीरिक कष्टों से राहत की उम्मीद लेकर भी पहुंचते हैं.
मंदिर को लेकर सबसे बड़ी मान्यता यह है कि यहां सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ माता के दरबार में ढोक लगाने से जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, हाथ-पैरों की पीड़ा और सिरदर्द जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. श्रद्धालुओं का कहना है कि माता के दरबार में की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती. यही वजह है कि कोटा ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों से लोग यहां अपनी पीड़ा लेकर पहुंचते हैं.
तीन पीढ़ियों से हो रही सेवा
मंदिर के वर्तमान पुजारी श्याम बिहारी शर्मा बताते हैं कि उनका परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से इस प्राचीन मंदिर की सेवा और पूजा-अर्चना करता आ रहा है. मंदिर में विशेष रूप से माता के पल्लू की पूजा की जाती है. सामान्य दिनों में प्रतिदिन 500 से 700 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि रविवार और विशेष अवसरों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है.

उनका कहना है कि यह मंदिर राजा-महाराजाओं के समय का माना जाता है. मंदिर के समीप स्थित पुराना तालाब भी तत्कालीन शासकों द्वारा बनवाया गया था. सैकड़ों वर्षों पुरानी यह आस्था आज भी लोगों को यहां आने के लिए प्रेरित करती है. मंदिर का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को मानसिक शांति भी प्रदान करता है.
दर्द से राहत की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं लोग
मंदिर में दर्शन करने पहुंची श्रद्धालु रजनी शर्मा ने बताया कि उन्हें उठने-बैठने में काफी परेशानी होती थी और डॉक्टरों ने घुटनों के ऑपरेशन की सलाह दी थी. किसी परिचित के कहने पर उन्होंने जाखोड़ा माता के दरबार में आकर तीन बार ढोक लगाई और नियमित दर्शन किए. उनका कहना है कि पहले जहां उन्हें जमीन पर बैठने और उठने में काफी दिक्कत होती थी, वहीं अब उन्हें काफी राहत महसूस हो रही है.
वहीं कोटा निवासी जितेंद्र मीणा ने बताया कि वे लंबे समय से घुटनों के दर्द से परेशान थे. माता के दरबार में आने और श्रद्धा के साथ प्रार्थना करने के बाद उन्हें पहले की तुलना में काफी आराम मिला है. उनका कहना है कि अब वे खुद को पहले से ज्यादा स्वस्थ महसूस करते हैं.
आस्था का ऐसा केंद्र, जहां हर सप्ताह उमड़ती है भीड़
डेरू माता मंदिर आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हजारों लोगों की उम्मीद और विश्वास का केंद्र बन चुका है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि माता की कृपा और सच्ची श्रद्धा से दुख-दर्द दूर होते हैं. हर सप्ताह सैकड़ों लोग यहां माथा टेकने पहुंचते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने पर पूजा-अर्चना तथा चढ़ावा अर्पित करते हैं.
सदियों पुरानी इस आस्था के दरबार में आज भी लोगों का विश्वास उसी तरह कायम है, जहां विज्ञान के साथ-साथ श्रद्धा भी लोगों को जीवन में नई उम्मीद देने का काम कर रही है.
रिपोर्टर: चेतन गुर्जर