Ganesh Chaturthi
Ganesh Chaturthi
गणेशोत्सव को लेकर भक्तों में उत्साह बढ़ने लगा है. भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होने वाला यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित है. मान्यता है कि गणपति बप्पा बुद्धि, सुख-समृद्धि देने वाले और सभी विघ्नों को दूर करने वाले देवता हैं. इसी वजह से गणेश चतुर्थी पर बड़ी संख्या में लोग घर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करते हैं. इस साल गणेशोत्सव 14 सितंबर से शुरू होगा और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ इसका समापन होगा. अगर आप भी घर में बप्पा को विराजमान करने जा रहे हैं, तो मूर्ति की स्थापना करते समय कुछ वास्तु और धार्मिक मान्यताओं का ध्यान रखना जरूरी है.
ईशान कोण में गणपति की स्थापना मानी जाती है शुभ
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को पूजा-पाठ के लिए बेहद शुभ माना जाता है. ऐसे में गणेश जी की मूर्ति को इस दिशा में रखना अच्छा माना जाता है. अगर ईशान कोण में जगह उपलब्ध नहीं है, तो उत्तर या पश्चिम दिशा में भी गणपति की स्थापना की जा सकती है.
किस दिशा में होना चाहिए गणपति का मुख
गणपति बप्पा की मूर्ति रखते समय उनके मुख की दिशा का भी ध्यान रखना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश का मुख घर के अंदर की ओर होना चाहिए. वहीं उनकी पीठ दीवार की तरफ होनी चाहिए. मान्यता है कि गणेश जी के सम्मुख भाग में सुख और समृद्धि का वास होता है. इसलिए मूर्ति को इस तरह रखना चाहिए कि उनकी पीठ घर के खुले हिस्से या मुख्य कमरे की ओर न हो.
जमीन पर न रखें गणेश जी की मूर्ति
गणपति की प्रतिमा को सीधे जमीन पर रखना उचित नहीं माना जाता है. मूर्ति की स्थापना के लिए साफ चौकी या पाटे का इस्तेमाल करना चाहिए. चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें. पूजा की जगह भी साफ और पवित्र होनी चाहिए.
कैसी हो गणपति की प्रतिमा
घर में गणपति की स्थापना के लिए मिट्टी से बनी प्रतिमा को प्राथमिकता दी जाती है. ऐसी प्रतिमा का विसर्जन भी आसानी से किया जा सकता है. प्रतिमा लाते समय उसके आकार और स्थापना के लिए उपलब्ध स्थान का भी ध्यान रखना चाहिए.
स्थापना के बाद इन बातों का रखें ध्यान
गणेश चतुर्थी के दिन स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें. इसके बाद चौकी पर कपड़ा बिछाकर गणपति बप्पा को विराजमान करें. भगवान गणेश को दूर्वा, फूल और मोदक अर्पित करें. विधि-विधान से पूजा और आरती करें. गणपति के घर में रहने तक रोज सुबह- शाम आरती और भोग लगाना शुभ माना जाता है. साथ ही पूजा स्थल की साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखें.
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