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Garud Puran Rules: मृत्यु के बाद शव के साथ भूलकर भी न करें ये 5 काम, गरुड़ पुराण के अनुसार आत्मा की मुक्ति में आती है बड़ी बाधा

मृत्यु को अगर करीब से समझें, तो उसका सार निकलेगा, आत्मा का परमात्मा से मिलन और सांसारिक बंधनों से छूटकर मुक्ति के रास्ते पर आगे बढ़ना है. मान्यता है कि इसी मुक्ति के मार्ग में कुछ ऐसी गलतियां बाधा बन सकती हैं, जो लोग अनजाने में कर बैठते हैं. जानिए वे पांच बातें, जिन्हें मृत्यु के बाद शव के साथ करने से बचने की सलाह गरुड़ पुराण में मिलती है.

Garud Puran Rules Garud Puran Rules

जन्म और मृत्यु दोनों ही जीवन का अटल सत्य है. कौन कब जन्मेगा और कैसे मरेगा ये पहले से तय होता है. मृत्यु के बाद शरीर नश्वर हो जाता है, लेकिन माना जाता है कि मुक्ति पाने के लिए आत्मा अपनी आगे की यात्रा पर निकलती है. यही वजह है कि अंतिम संस्कार से जुड़े हर नियम और परंपरा का विशेष महत्व होता है. गरुड़ पुराण और लोक मान्यताओं के अनुसार, अंतिम विदाई के दौरान कुछ ऐसी गलतियां हैं, जिनको करने से बचना चाहिए. माना जाता है कि इन नियमों का पालन करने से आत्मा की आगे की यात्रा आसान और काफी शांतिपूर्ण हो जाती है. आइए जानते हैं वे पांच बातें, जिनका परिजनों द्वारा शरीर त्यागने के बाद विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है.

1. सूर्यास्त के बाद न करें दाह संस्कार
गरुड़ पुराण के अनुसार, सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं करना चाहिए. कहा जाता है कि दिन का समय शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है. आत्मा को इस वक्त दिव्य शक्ति मिलती है आगे की यात्रा करने के लिए. जबकि रात में दाह संस्कार करने से आत्मा को परलोक की यात्रा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि इस वक्त नकारात्मक ऊर्जा अपने चरम पर होती है. कई बार इसकी चपेट में आकर आत्मा भटकने लगती है. इसी वजह से अधिकांश परिवार कोशिश करते हैं कि अंतिम संस्कार सूर्यास्त से पहले ही पूरा हो जाए.

2. शव को कभी अकेला न छोड़ें
गरुड़ पुराण ये भी कहता है कि किसी व्यक्ति के प्राण निकलने के बाद उसके शव को भूल कर भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए. इसलिए अंतिम संस्कार तक परिजन या परिचित शव के पास मौजूद रहते हैं. पुराणों में लिखा मिलता है कि मृत्यु के बाद शरीर नश्वर हो जाता है. कई बार आस-पास भटकने वाली बुरी आत्मा उसमें प्रवेश करने की कोशिश करती है. परिजनों के रहने पर धूप-बत्ती और पारंपरिक गतिविधियों के कारण वातावरण पवित्र रहता है, जिससे ऐसी शक्तियां हावी नहीं हो पाती हैं. 

3. जलांजलि देते समय आंसू गिराने से बचें
शायद किसी को खोने का दुख कोई और नहीं समझ सकता, जो स्वाभाविक है, लेकिन धार्मिक ग्रंथों में जलांजलि देते समय अत्यधिक विलाप या आंसू बहाने से आत्मा को आगे की यात्रा करने में दिक्कत आती है. पिंड दान से पहले तक आत्मा धरती लोक के बंधनों से बंधी रहती है. ऐसे में विलाप या रोने से आत्मा मोहग्रस्त हो कर कई बार अपने मार्ग से भटक जाती है. गरुड़ पुराण में उल्लेख मिलता है कि अंतिम विदाई के समय परिजनों का अत्यधिक मोह और विलाप आत्मा की आगे की यात्रा में बाधा बन सकता है, जिससे उसे मुक्ति मिलने में कठिनाई हो सकती है. इसलिए इस समय संयम रखने और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना उनके लिए अच्छा होता है.

4. पंचक में बिना विधि के न करें अंतिम संस्कार
ज्योतिष शास्त्र में पंचक काल को संभल के कार्य करने वाला कहा जाता है, खास कर मृत्यु पंचक का संयोग. यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु पंचक के दौरान होती है, तो ऐसे समय में सामान्य तरीके से अंतिम संस्कार करने के बजाय कुछ अतिरिक्त धार्मिक विधियां करना आत्मा और परिवार के लिए अच्छा होता है. दरअसल पंचक के वक्त किसी की परिवार में मौत होती है, तो वह अपने साथ 5 लोगों को और लेकर जाता है. यदि पंचक में इन नियमों का पालन न किया जाए, तो परिवार पर अन्य संकट आने की आशंका रहती है. इसी कारण कई स्थानों पर परिजन कुश या आटे के पांच पुतले बनाकर उन्हें शव के साथ ही उसी विधि-विधान से दाहाग्नि दी जाती है. यह परंपरा पंचक दोष के निवारण के रूप में मानी जाती है.

5. श्मशान से लौटते समय पीछे मुड़कर न देखें
अंतिम संस्कार के बाद जब सभी लोग श्मशान से वापस लौटते हैं, तो एक बात का विशेष ध्यान रखा चाहिए कि पीछे मुड़कर चिता या राख की ओर न देखें. धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा करने से मृतक आत्मा का मोह अपने परिजनों के प्रति बढ़ जाता है. माना जाता है कि पीछे मुड़कर देखने से आत्मा की आगे की यात्रा प्रभावित हो सकती है और आत्मा मोह में पड़ के परिजनों के साथ लौट सकती है. इसलिए लोग अंतिम संस्कार के बाद बिना पीछे देखे घर लौटते हैं. कई बार ऐसा लगता है कि कोई उन्हें कोई पीछे से आवाज दे रहा, फिर भी भूल कर भी पीछे न देखें. कई बार ये जानलेवा हो सकता है.
 

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