gauri vrat 2026
gauri vrat 2026
भगवान शिव और माता गौरी की कृपा पाने के लिए रखा जाने वाला गौरी व्रत हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. यह व्रत खासतौर पर अविवाहित लड़कियां योग्य जीवनसाथी की कामना के लिए रखती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए इसका पालन करती हैं. आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरू होकर पांच दिनों तक चलने वाला यह व्रत इस बार 25 जुलाई 2026 से आरंभ होगा और 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन संपन्न होगा.
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9:12 बजे शुरू होकर 25 जुलाई को सुबह 11:34 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर गौरी व्रत की शुरुआत शनिवार, 25 जुलाई 2026 से मानी जाएगी. इसी दिन देवशयनी एकादशी भी है, जब भगवान विष्णु योग निद्रा में प्रवेश करते हैं और चातुर्मास का आरंभ होता है.
जानें शुभ मुहूर्त
गौरी व्रत के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:16 बजे से 4:57 बजे तक रहेगा. अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक होगा. सुबह का शुभ-उत्तम मुहूर्त 7:21 बजे से 9:03 बजे तक रहेगा. वहीं प्रदोष काल में लाभ-उन्नति मुहूर्त शाम 7:17 बजे से 8:34 बजे तक रहेगा.
29 जुलाई को होगा व्रत का समापन
गौरी व्रत कुल पांच दिनों तक चलता है. इस दौरान महिलाएं पवित्र मिट्टी से माता गौरी, भगवान शिव और भगवान गणेश की प्रतिमा बनाकर सुबह-शाम पूजा और आरती करती हैं. कई श्रद्धालु रात्रि जागरण भी करते हैं. व्रत का समापन आषाढ़ पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा के दिन पारण के साथ किया जाता है. वर्ष 2026 में यह व्रत 29 जुलाई, बुधवार को समाप्त होगा.
क्या है गौरी व्रत का महत्व
गौरी व्रत को मोरकत व्रत भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से माता गौरी और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है. अविवाहित कन्याओं को मनचाहा और योग्य वर मिलने का आशीर्वाद मिलता है, जबकि विवाहित महिलाओं के दांपत्य जीवन में सुख, प्रेम और समृद्धि बनी रहती है. यही वजह है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में महिलाएं इस व्रत को पूरे विधि-विधान के साथ करती हैं.
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