Gayaji News
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मोक्ष की पावन भूमि गयाजी में 15 दिनों तक चलने वाली पितृपक्ष मेला के दौरान देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी विदेशी श्रद्धालु गयाजी में अपने पितरों के मोक्ष की कामना को लेकर पिंडदान और तर्पण करने के लिए पहुँच रहे है. विष्णुपद मंदिर क्षेत्र में फल्गु नदी के तट पर स्थित देवघाट पर रूस , यूक्रेन , इटली और जर्मनी सहित कई देश के विदेशी श्रद्धालु सनातन परंपरा के अनुसार अपने मृत पूर्वजों के आत्म शांति और मोक्ष की कामना को लेकर पिंडदान और तर्पण कर रहे है.
विदेशी श्रद्धालु ने किया पिंडदान-
ज्ञात हो की सभी विदेशी श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के समीप देवघाट पर पूरे विधि -विधान के साथ अपने पूर्वज पितरों का पिंडदान और तर्पण किया है. वहीं, इस दौरान जिला प्रशासन के द्वारा विदेशी श्रद्धालु के पिंडदान के स्थान पर सुरक्षा के इंतजाम किया गया है. गयाजी में विदेशी श्रद्धालुओं की यह आस्था लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और अलग अलग देश और संस्कृतियों से आने वाले श्रद्धालुओं को पितृपक्ष में गयाजी पहुंचना इस बात को दर्शाता है कि पिंडदान और मोक्ष की मान्यता देश ही नहीं विदेशों में भी प्रचलित है.
यूक्रेन की महिला ने किया पिंडदान-
यूक्रेन से आई विदेशी महिला एलिस जंडरा ने बताया कि सनातन धर्म से प्रभावित होकर अपने पितरों की मोक्ष की कामना को लेकर गयाजी में पिंडदान और तर्पण करने के लिए आये हुए है और हमारे साथ कई देश के श्रद्धालु भी है और यहाँ पर पिंडदान कर रहे है.
पुरोहित ने क्या बताया?
विदेशी श्रद्धालुओं को पिंडदान करा रहे पुरोहित लोकनाथ गौड़ ने बताया की पितृपक्ष मेला के दौरान विदेश से आये महिला श्रद्धालुओं कोई इटली से है तो कोई जर्मनी से है और अलग-अलग देश से आये है और यह सभी विदेशी श्रद्धालु विदेशो में सनातन धर्म को स्वीकार कर चुके है और यह सभी विदेशी श्रद्धालु पहले ईसाई धर्म को मानते थे. मगर इन लोगों को हमारे सनातन धर्म बहुत ही अच्छा लगा तो इन लोगों ने पूछा कि सनातन धर्म पहले चरण में क्या करना चाहिए. तब हमने इन लोगों को बताया कि सनातन धर्म में सबसे पहले पितरों के उद्धार कर के ही आप लोग आगे चल सकते है तो उसी को मानते हुए यह सभी विदेशी श्रद्धालु यहाँ पर अपने पूर्वजों का पिंडदान कर रहे है और पिंडदान के बाद अपना पूरा समय सनातन धर्म को देंगे.
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