Grandmother on the Kanwar Yatra
Grandmother on the Kanwar Yatra
सावन के पावन महीने में हरिद्वार से लाखों शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं. इसी बीच एक ऐसी कांवड़ यात्रा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जो सिर्फ आस्था ही नहीं बल्कि परिवार के प्रति समर्पण और सेवा की मिसाल भी पेश कर रही है. दिल्ली के विकास नगर निवासी अरविंद अपनी बुजुर्ग दादी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से पैदल यात्रा कर रहे हैं. जहां भी यह अनोखी कांवड़ पहुंच रही है, लोग रुककर इसे देख रहे हैं और अरविंद की भक्ति व दादी के प्रति उनके सम्मान की जमकर सराहना कर रहे हैं.
वचन निभाने के लिए लिया संकल्प
हरिद्वार से मां गंगा का पवित्र जल लेकर निकले अरविंद पिछले 10 दिनों से रोज करीब 10 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं. गुरुवार को वह गाजियाबाद पहुंचे, जहां भगवान भोलेनाथ के जयघोष के बीच उनकी अनोखी कांवड़ यात्रा को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई. कई लोगों ने इसे परिवार के प्रति समर्पण और भारतीय संस्कारों का प्रेरक उदाहरण बताया.
अरविंद ने बताया कि उन्होंने अपनी दादी से वादा किया था कि वह उन्हें धार्मिक यात्रा कराएंगे. इसी वचन को पूरा करने के लिए उन्होंने दादी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से पैदल यात्रा शुरू की. उनका कहना है कि भगवान शिव की कृपा और दादी के आशीर्वाद से अब तक की यात्रा बिना किसी परेशानी के पूरी होती जा रही है और उन्हें भरोसा है कि उनका संकल्प भी सफल होगा.
दादी की सेवा को मानते हैं सबसे बड़ी पूजा
अरविंद अविवाहित हैं और पेशे से डीजे का काम करते हैं. उन्होंने बताया कि भगवान शिव से उनकी सिर्फ एक ही प्रार्थना है कि उनकी दादी को लंबी उम्र, अच्छा स्वास्थ्य और हमेशा खुशहाल जीवन मिले. उनके अनुसार, दादी की सेवा करना ही उनके लिए सबसे बड़ी पूजा है.
गाजियाबाद में इस अनोखी कांवड़ यात्रा को देखने वाले श्रद्धालु भी अरविंद की सेवा भावना की खुलकर तारीफ कर रहे हैं. कई लोग उनके साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं, जबकि कई उनकी दादी का आशीर्वाद लेकर आगे बढ़ रहे हैं. लोगों का कहना है कि यह यात्रा केवल गंगाजल लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार, संस्कार और अपने वचन के प्रति समर्पण का ऐसा संदेश देती है, जो समाज को रिश्तों की अहमियत और बड़ों के सम्मान की सीख देता है.
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