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Gangeshwar Mahadev Temple: एक ऐसा मंदिर जहां समुद्र की लहरें स्वयं शिवलिंग का करती हैं जलाभिषेक, पांडवों ने की थी पूजा, जानें इस शिवधाम की महिमा

देश में सैकड़ों भगवान शिव के मंदिर हैं. आज हम आपको ऐसे शिव मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां समुद्र की लहरें स्वयं शिवलिंग का करती हैं जलाभिषेक. इस मंदिर का पांडवों से संबंध है. जी हां, हम बात कर रहे हैं केंद्र शासित प्रदेश दीव के फुदम गांव के पास स्थित गंगेश्वर महादेव मंदिर की. आइए इस मंदिर की महिमा जानते हैं. 

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Gangeshwar Mahadev Gangeshwar Mahadev

अरब सागर के किनारे... जहां समुद्र की लहरें चट्टानों से टकराती हैं... और यही लहरें भगवान शिव के शिवलिंग का स्वयं जलाभिषेक करती हैं. यह कोई फिल्मी दृश्य नहीं, बल्कि केंद्र शासित प्रदेश दीव में स्थित एक ऐसा पवित्र स्थान है, जहां प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं गंगेश्वर महादेव मंदिर की. आज हम जानेंगे इस मंदिर का इतिहास, इसकी पौराणिक मान्यता, पांच शिवलिंगों की विशेषता और आखिर समुद्र भगवान शिव का जलाभिषेक कैसे करता है?

भगवान शिव के पांच शिवलिंग हैं विराजमान 
गंगेश्वर महादेव मंदिर अरब सागर के किनारे स्थित है. दीव शहर से यह मंदिर करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर है. समुद्र तट की चट्टानों के बीच स्थित यह मंदिर आकार में भले ही भव्य न हो, लेकिन अपनी अनोखी विशेषता के कारण बेहद खास है. यहां भगवान शिव के पांच शिवलिंग विराजमान हैं और यही इस स्थान की सबसे बड़ी पहचान है. स्थानीय मान्यता और धार्मिक परंपरा के अनुसार, महाभारत काल में पांचों पांडव वनवास के दौरान इस क्षेत्र में आए थे. ऐसी मान्यता है कि पांडवों ने यहां भगवान शिव की आराधना की और पांच शिवलिंग स्थापित किए. कहा जाता है कि पांचों शिवलिंगों का आकार अलग-अलग है. मान्यता के अनुसार पहला शिवलिंग युधिष्ठिर, दूसरा भीम, तीसरा अर्जुन, चौथा सहदेव और पांचवां नकुल से जुड़ा माना जाता है. पांडवों ने अपने कद के हिसाब से शिवलिंग बनाए थे.

लहरें आती हैं और करती हैं शिवलिंग को स्पर्श 
अब बात करते हैं गंगेश्वर महादेव मंदिर की सबसे अद्भुत विशेषता की. मंदिर समुद्र के बेहद करीब स्थित है. जब समुद्र में ज्वार आता है तो अरब सागर की लहरें चट्टानों के बीच से आगे बढ़ती हैं और शिवलिंग तक पहुंच जाती हैं. समुद्र का पानी शिवलिंग को स्पर्श करता है और इस तरह भगवान शिव का प्राकृतिक जलाभिषेक होता है. लहरें आती हैं, शिवलिंग को स्पर्श करती हैं और फिर वापस समुद्र में समा जाती हैं. यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए बेहद आध्यात्मिक और अद्भुत अनुभव होता है. जब समुद्र में भाटा आता है, तो पानी का स्तर नीचे चला जाता है और चट्टानों के बीच स्थित पांचों शिवलिंग अधिक स्पष्ट दिखाई देते हैं. इसी कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ज्वार-भाटा के समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम 
एक तरफ विशाल अरब सागर, दूसरी तरफ प्राकृतिक चट्टानें और इनके बीच भगवान शिव के पवित्र शिवलिंग स्थित हैं. समुद्र की लहरों की आवाज और हर-हर महादेव के जयघोष से यहां का वातावरण भक्तिमय हो जाता है. श्रावण मास और महाशिवरात्रि जैसे पवित्र अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की विशेष आस्था देखने को मिलती है. भक्त भगवान शिव को जल, बिल्वपत्र और फूल अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं. गंगेश्वर महादेव मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि प्रकृति और आस्था के अद्भुत संगम का भी प्रतीक है.

दीव आने वाले पर्यटकों के लिए समुद्र तट, प्राकृतिक चट्टानें और समुद्र के बीच स्थित यह अनोखा मंदिर एक अलग अनुभव प्रदान करता है. खासकर जब समुद्र की लहरें शिवलिंग तक पहुंचकर उनका जलाभिषेक करती हैं तो यह दृश्य श्रद्धा के साथ-साथ कैमरे में कैद करने के लिए भी बेहद आकर्षक बन जाता है. अरब सागर. प्राकृतिक जलाभिषेक, पांच पवित्र शिवलिंग और अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण का संगम गंगेश्वर महादेव मंदिर को दीव का एक अनोखा धार्मिक और पर्यटन स्थल बनाता है. यहां प्रकृति भी भगवान शिव की पूजा करती हुई नजर आती है.

 (दिलीप मोरी की रिपोर्ट)