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Choti Diwali: छोटी दिवाली पर किन कामों को करें... क्या है नरक चतुर्दशी की पौराणिक कथा, कैसे करें इन दिन दीपदान?

छोटी दिवाली पर क्या करना चाहिए? नरक चतुर्दशी की पूजा विधि क्या है? यम दीपदान का महत्व और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर वध की पौराणिक कथा क्या है? छोटी दिवाली पर दीपक जलाने की परंपरा क्या है?

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दिवाली का त्योहार पांच दिनों तक मनाया जाता है. इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और इसका समापन भाई दूज के साथ होता है. दिवाली से एक दिन पहले छोटी दिवाली मनाई जाती है. इसे नरक चतुर्दशी, नरक चौदस और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और यमराज की पूजा करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता है कि छोटी दिवाली पर दीपक जलाने और पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है. चलिए बताते हैं कि छोटी दिवाली पर क्या करना चाहिए और इससे जुड़ी पौराणिक कथा क्या है.

क्यों मनाई जाती है छोटी दिवाली?

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी मनाई जाती है. इसे छोटी दिवाली इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह मुख्य दिवाली से एक दिन पहले आती है. इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और शाम को दीपक जलाकर घर को रोशन करते हैं.

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नाम के राक्षस का वध किया था. उसके अत्याचारों से लोगों को मुक्ति दिलाई थी. इसी खुशी में लोगों ने दीपक जलाकर उत्सव मनाया था.

छोटी दिवाली की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में नरकासुर नाम का एक बहुत शक्तिशाली राक्षस था. वह अपनी ताकत के घमंड में लोगों को परेशान करता था. उसने देवताओं और ऋषि-मुनियों का जीना मुश्किल कर दिया था. इतना ही नहीं, उसने 16 हजार से ज्यादा महिलाओं को बंदी बनाकर रखा था.

नरकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर सभी ने भगवान श्रीकृष्ण से मदद मांगी. इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ नरकासुर से युद्ध करने पहुंचे. दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ. आखिरकार नरकासुर का अंत हो गया और बंदी बनाई गई महिलाओं को आजादी मिली.

कहा जाता है कि नरकासुर की मृत्यु के बाद लोगों ने खुशी में दीपक जलाए. तभी से इस दिन को नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई.

छोटी दिवाली पर क्या करना चाहिए?

छोटी दिवाली के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है. इस दिन तिल या सरसों के तेल से मालिश करके उबटन लगाने की भी परंपरा है. इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से सुंदरता और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है. स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें. उन्हें फूल, धूप, दीप और मिठाई चढ़ाएं. इसके बाद नरकासुर वध की कथा सुनें.

छोटी दिवाली पर क्यों जलाया जाता है यम दीपक?

छोटी दिवाली पर यमराज के नाम से दीपक जलाने का विशेष महत्व है. इसे यम दीपदान कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, शाम के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का डर दूर होता है. इससे परिवार के लोगों की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है.

इस दिन घर के मुख्य दरवाजे और आंगन में भी दीपक जलाएं. जरूरतमंद लोगों को भोजन और कपड़े दान करना भी शुभ माना जाता है. छोटी दिवाली का त्योहार हमें सिखाता है कि बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न हो, आखिर में जीत अच्छाई की ही होती है.