Jagannath Rath Yatra
Jagannath Rath Yatra
ओडिशा में साल भर बहने वाली भक्ति धारा इस वक्त उफान पर है. हर किसी को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का इंतजार है. जिसकी तैयारी पूरी तेजी से की जा रही है. हर साल की तरह इस बार भी तीन भव्य रथ तैयार किए जा रहे हैं. आस्था, परंपरा और हुनर के इस अनूठे संगम को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचने लगे हैं.
पुरी में भक्ति और उत्साह का माहौल-
पुरी की पवित्र धरती पर इन दिनों भक्ति और उत्साह का माहौल है. मंदिर के रथखला में पारंपरिक कारीगर दिन-रात मेहनत कर विशाल रथों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. हर साल अक्षय तृतीया के दिन से पवित्र रथ का निर्माण शुरू होता है और यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. रथ निर्माण में करीब 100 से अधिक पारंपरिक कारीगर और सेवायत जुटे हुए हैं.
क्या होता है रथ?
भगवान जगन्नाथ के रथ नंदीघोष की ऊंचाई लगभग 45 फीट है और इसमें 16 विशाल पहिए लगाए जाते हैं. भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ करीब 44 फीट ऊंचा होता है, जिसमें 14 पहिए लगाए जाते हैं. वहीं देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ लगभग 43 फीट ऊंचा और 12 पहियों वाला होता है. इन तीनों रथों का निर्माण हर साल नई लकड़ियों का इस्तेमाल होता है.
16 जुलाई को निकाली जाएगी रथ यात्रा-
इस साल 16 जुलाई को निकाली जाएगी पवित्र रथ यात्रा. इस भव्य रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक की यात्रा करेंगे. करीब तीन किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर लाखों श्रद्धालु रथों को खींचने के लिए उमड़ पड़ते हैं.
ये रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत और शिल्प परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है. प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसियां श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम जुटी हैं. अनुमान है कि इस साल भी देश और दुनिया से लाखों भक्त पुरी पहुंचेंगे और भगवान जगन्नाथ की इस दिव्य यात्रा के साक्षी बनेंगे.
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