Jagannath Rath Yatra (Photo: PTI)
Jagannath Rath Yatra (Photo: PTI)
Jagannath Rath Yatra: देश-विदेश के लाखों भक्तों को जिस पावन घड़ी का इंतजार था, वह घड़ी आज आ गई है. जी हां, ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 16 जुलाई से शुरू हो रही है. इस रथयात्रा का समापन 27 जुलाई 2026 को नीलाद्री बीजे अनुष्ठान के साथ होगा.
ऐसी धार्मिक मान्यता है कि रथयात्रा को दौरान भगवान जगन्नाथ स्वयं अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथों पर सवार होकर भक्तों के बीच आते हैं और उन्हें दर्शन देते हैं. प्रभु जगन्नाथ मुख्य मंदिर से प्रस्थान कर अपनी मौसी के घर गुंडीचा मंदिर जाते हैं. रथयात्रा के दौरान शंख की ध्वनि, ढोल-मंजीरों की थाप और जय जगन्नाथ के गगनभेदी जयकारों के बीच पुरी की धरती बैकुंठ धाम जैसी नजर आने लगती है. इस अलौकिक दृश्य का हिस्सा बनने के लिए हर साल दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु पुरी धाम आते हैं. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जो रथयात्रा की रस्सी को खींचता है, उसको पापों से मुक्ति मिल जाती है और श्रीहरि के चरणों में स्थान प्राप्त होता है.पुरी रथ यात्रा का वर्णन्न प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में मिलता है. स्कंद पुराण के उत्कल खंड में भगवान जगन्नाथ की गुंडिचा यात्रा, रथारोहण और रथ दर्शन के महत्व का वर्णन किया गया है. जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों को दर्शन देने आते हैं. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु मंदिर के भीतर नहीं जा पाते, उनपर प्रभु खुद कृपा बरसाने सड़क पर आते हैं. शास्त्रों के मुताबिक गुंडीचा मंदिर में भगवान के आड़प दर्शन करने से 100 यज्ञों के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है.
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को ही क्यों निकलती है रथयात्रा और कैसे तय होता है कार्यक्रम
आपको मालूम हो कि पुरी में हर साल प्रभु जगन्नाथ रथयात्रा आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है. ज्योतिष व धार्मिक परंपराओं के मुताबिक शुक्ल पक्ष शुभ कार्यों को करने के लिए बेहद अनुकूल होता है. इसके साथ ही द्वितीया तिथि यात्रा, धार्मिक अनुष्ठान और नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है. इसी के चलते प्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा इस तिथि को निकाली जाती है. आपको मालूम हो कि जगन्नाथ रथयात्रा का पूरा कार्यक्रम वैदिक पंचांग, ओड़िया पंचांग (पंजी), श्रीमंदिर की प्राचीन नीतियों और धार्मिक परंपराओं के आधार पर तय किया जाता है.
जगन्नाथ रथयात्रा का ऐसा है शेड्यूल
16 जुलाई 2026, गुरुवार: रथयात्रा का भव्य शुभारंभ. भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं.
20 जुलाई 2026, सोमवार: गुंडिचा मंदिर में प्रभु जगन्नाथ के प्रवास के दौरान हेरा पंचमी का आयोजन होता है. इस दिन मां लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से मिलने गुंडिचा मंदिर आती हैं.
23 जुलाई 2026, गुरुवार: गुंडिचा मंदिर में प्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और सुभद्रा के विशेष संध्या दर्शन होते हैं. हजारों श्रद्धालु इस दिन प्रभु के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
24 जुलाई 2026, शुक्रवार: गुंडिचा मंदिर में प्रवास पूरा करने के बाद प्रभु जगन्नाथ अपने रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर की ओर वापसी करते हैं. इसे बहुदा यात्रा कहा जाता है.
25 जुलाई 2026, शनिवार: इस दिन तीनों देवों भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का सोने के भव्य आभूषणों से अलौकिक शृंगार किया जाता है. इस भव्य स्वरूप को सुना बेषा कहा जाता है.
26 जुलाई 2026, रविवार: इस दिन प्रभु जगन्नाथ को विशेष मीठा पेय अर्पित किया जाता है. इसे अधर पाना कहा जाता है. आपको मालूम हो कि यह अनुष्ठान रथयात्रा की महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल है.
27 जुलाई 2026, सोमवार: रथयात्रा का अंतिम चरण नीलाद्री बीजे होता है. इस दिन प्रभु जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विधि-विधान के साथ पुनः श्रीमंदिर के रत्न सिंहासन पर विराजमान होते हैं. इसी के साथ जगन्नाथ रथयात्रा का समापन होता है.