Jalna Eco-Friendly Ganesh Utsav
Jalna Eco-Friendly Ganesh Utsav
गणेश उत्सव आते ही हर तरफ गणपति बप्पा की भक्ति और उत्साह देखने को मिलता है. लेकिन महाराष्ट्र के जालना जिले में गणेश उत्सव का एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने भक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया. यहां स्कूल के छात्रों ने किसी मूर्ति या पंडाल में नहीं, बल्कि एक नीम के पेड़ पर ही गणपति बप्पा का सुंदर स्वरूप साकार कर दिया.
नीम के पेड़ पर बनाया गणपति का स्वरूप
यह अनोखी पहल जालना जिले के जाफराबाद तहसील के माहोरा गांव स्थित लिटल स्टार इंग्लिश स्कूल में की गई. स्कूल की प्राचार्या अनिता नवले की संकल्पना पर छात्रों ने पेड़, पत्तियों और फूलों जैसी प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल कर गणपति बप्पा का मनमोहक स्वरूप तैयार किया. इस पहल का मकसद छात्रों को पर्यावरण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाना था. लगातार बढ़ते प्रदूषण और प्रकृति को हो रहे नुकसान के बीच स्कूल ने गणेश उत्सव को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की कोशिश की.
पूजा और आरती के दौरान भक्तिमय हुआ माहौल
पेड़ पर गणपति का स्वरूप तैयार करने के बाद विधिवत गणेश पूजन और आरती की गई. इस दौरान प्राचार्या अनिता नवले के साथ शिक्षक और छात्र मौजूद रहे. पूजा के दौरान गणपति बप्पा का जयघोष किया गया, जिससे स्कूल का पूरा परिसर भक्तिमय हो गया. इस अनोखे गणपति को देखने के लिए ग्रामीणों और छात्रों में भी काफी उत्साह नजर आया.
मिट्टी और प्राकृतिक चीजों से बनाई गणेश प्रतिमाएं
प्राचार्या अनिता नवले ने छात्रों को शाडू मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं के महत्व के बारे में भी बताया. उन्होंने प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने और सजावट के लिए प्राकृतिक चीजों का उपयोग करने की सलाह दी. साथ ही गणेश प्रतिमा के पर्यावरणपूरक विसर्जन को लेकर भी छात्रों को जागरूक किया गया. स्कूल के कई छात्रों ने मिट्टी, पेड़ों की पत्तियों, फूलों, बीजों और अनाज जैसी प्राकृतिक चीजों से खुद गणेश प्रतिमाएं भी तैयार कीं.
इस पहल के जरिए बच्चों ने साफ संदेश दिया कि गणेश उत्सव सिर्फ पूजा और उत्सव तक सीमित नहीं है. इसे प्रकृति, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी से भी जोड़ा जा सकता है. स्कूल की इस पहल का संदेश है - परंपरा भी निभाएं और पर्यावरण भी बचाएं.
ये भी पढ़ें: