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जान‍िए मां खीर भवानी की महिमा के बारे में जहां अमित शाह ने की पूजा-अर्चना

कश्मीरी पंडितों के आस्था के अनुपम केंद्र मां खीर भवानी के मंदिर में पूरे साल भक्तों का तांता लगा रहता है. इस मंदिर से कई मान्यताएं जुड़ी हैं. इस मंदिर में देवी रागन्या की पूजा की जाती है जिन्हें श्यामा के नाम से भी जाना जाता है.

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हाइलाइट्स
  • रामायण से जुड़ी है कथा 

  • कश्मीर की भविष्यवाणी करने वाला जलस्त्रोत 

  •  कश्मीरी पंडितों के आस्था का अनुपम केंद्र

  • श्रीनगर से महज 24 किलोमीटर की दूरी पर है स्थित

गृहमंत्री अमित शाह जम्मू कश्मीर के अपने तीन दिवसीय दौरे के अंतिम दिन मां खीर भवानी के दरबार पहुंचे और पूजा अर्चना की. अमित शाह ने कहा कि आस्था के इस मंदिर में एक ऐसी अद्भुत शक्ति है जिसकी एहसास यहां आकर होता है. गांदरबल में स्थित मां खीर भवानी का ये धाम सदा से घाटी में हिंदुओं की अगाध श्रद्धा का केंद्र रहा है. यहां साल भर देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं से मंदिर का तांता लगा रहता है.

श्रीनगर से महज 24 किलोमीटर की दूरी पर है स्थित

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से महज 24 किलोमीटर की दूरी पर गांदरबल जिले के तुल्मुल्ला शहर में मौजूद यह खीर भवानी मंदिर हिंदू देवी रागन्या को समर्पित है. गांदरबल स्थित ये मंदिर घाटी में रहने वाले कश्मीरी पंडितों के लिए भी पूजा-अर्चना का अहम स्थान है.  यहां देवी को खीर का भोग लगाया जाता है. मान्यता है कि खीर का भोग  माता को अत्यंत प्रिय है और खीर का भोग चढ़ाने पर माता अपने भक्तों से प्रसन्न  रहती हैं. मंदिर में आने वाले भक्तों को प्रसाद के रूप में यही खीर दी जाती है.

रामायण से जुड़ी है कथा 

देवी रागन्या को श्यामा के नाम से भी जाना जाता है. इस मंदिर से जुड़ी कई पौराणिक मान्यताएं हैं. एक कहानी इसे  रामायण काल से भी जोड़ती है. मान्यता है कि माता श्यामा रावण काल के दौरान श्रीलंका से कश्मीर आई थीं. कथा  है कि कभी जिस रावण की तपस्या से प्रसन्न होकर मां खीर भवानी ने अपना देश छोड़ा था, उसी रावण के दुराचार से रुष्ट होकर, उन्होंने दोबारा अपने देश में वापस आने का निर्णय किया था. जिसके बाद हनुमान उन्हें लंका से कश्मीर लेकर आए थे.

कश्मीर की भविष्यवाणी करने वाला जलस्त्रोत 

इस मंदिर से जुड़ी और भी कई पौराणिक मान्यताएं हैं. मंदिर में मौजूद एक जलस्रोत के बारे में कहा जाता है कि यह कश्मीर की घटनाओं की भविष्यवाणी करता है. कश्मीरी पंडित माता रागन्या के मंदिर के इस जलस्रोत को पवित्र मानते हैं. इनका मानना है कि वार्षिक मेले के मौके पर जलस्रोत के पानी का रंग आने वाले साल के दौरान कश्मीर में घटनाओं की स्थिति की भविष्यवाणी करता है. बताया जाता है कि वर्ष 2014 में कश्मीर में जब बाढ़ आई थी तो यहां पानी का रंग काला हो गया था.

 कश्मीरी पंडितों के आस्था का अनुपम केंद्र

मां खीर भवानी पर कश्मीरी पंडितों की विशेष आस्था है. 1990 के दशक में जब घाटी में पांव पसारते आतंक ने कश्मीरी पंडितों को उनका घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया तब अपने घर से विस्थापित कश्मीरी पंडित जहां भी गए उन्होंने मां खीर भवानी के प्रतिरूप को वहां स्थापित कर लिया. जम्मू का ये खीर भवानी मंदिर भी कश्मीरी पंडितों की आस्था का ऐसा ही अनुपम केंद्र है. अपने ही घर से पलायन के बाद भी कश्मीरी पंडितों के हृदय में मां खीर भवानी के प्रति आज भी अटूट आस्था है.