
Kainchi Dham
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कैंची धाम में पिछले वीकेंड उमड़ी अप्रत्याशित श्रद्धालुओं की भीड़ ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. श्रद्धालुओं की संख्या 50 हजार का आंकड़ा पार करने के बाद अब प्रशासन ने भविष्य की भीड़ को लेकर ठोस और स्थायी व्यवस्था बनाने की कवायद शुरू कर दी है.
कैंची धाम में ट्रैफिक मैनेजमेंट, पार्किंग और क्राउड कंट्रोल को लेकर कुमाऊँ कमिश्नर दीपक रावत की अध्यक्षता में सभी स्टेक होल्डर्स की महत्वपूर्ण बैठक हुई. सबसे अहम फैसला श्रद्धालुओं के रजिस्ट्रेशन को लेकर हुआ है.
नीम करौली के दर्शन का बदलेगा सिस्टम-
प्रशासन का मानना है कि जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि किसी विशेष दिन कैंची धाम में कितने श्रद्धालु पहुंचने वाले हैं, तब तक पार्किंग, ट्रैफिक, शटल सेवा, सुरक्षा और मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं की प्रभावी प्लानिंग संभव नहीं है.
इसी को देखते हुए डीएम और एसएसपी की ओर से शासन को संयुक्त रूप से श्रद्धालुओं के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू करने की सिफारिश भेजी जाएगी.
यह पहल कुमाऊँ कमिश्नर दीपक रावत की बैठक में सामने आई सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक रही है. रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू होने के बाद प्रशासन के पास पहले से यह अनुमान होगा कि किस दिन कितने श्रद्धालु कैंची धाम पहुंच सकते हैं और उसी के अनुरूप ट्रैफिक, पार्किंग, शटल और सुरक्षा व्यवस्था तैयार की जा सकेगी.
फिलहाल 20-25 हजार श्रद्धालु हैं मैनेजेबल कैप-
फिलहाल 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं की संख्या को मैनेजेबल कैप के तौर पर रखा गया है. हालांकि यह अंतिम आंकड़ा नहीं है और परिस्थितियों के अनुसार इसे घटाया या बढ़ाया जा सकता है.
प्रशासन का साफ कहना है कि उद्देश्य केवल श्रद्धालुओं की संख्या नियंत्रित करना नहीं, बल्कि कैंची धाम की भीड़ का असर भवाली-अल्मोड़ा हाईवे पर न पड़ने देना है. हाईवे उन लोगों के लिए भी सुचारु रहना चाहिए जो अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ सहित दूसरे क्षेत्रों की यात्रा कर रहे हैं.
अलग-अलग होगी एंट्री और एग्जिट-
दूसरा बड़ा फैसला मंदिर के भीतर क्राउड मैनेजमेंट को लेकर हुआ है. पिछले दिनों सामने आए विजुअल्स में मंदिर परिसर के भीतर अत्यधिक भीड़ दिखाई दी. ऐसी स्थिति में भगदड़ या किसी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. इसीलिए मंदिर की एंट्री और एग्जिट को अलग-अलग रखने पर सहमति बनी है. प्रशासन का मानना है कि श्रद्धालुओं की आवाजाही एक ही दिशा में व्यवस्थित होने से आमने-सामने की भीड़ और दबाव कम होगा तथा सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी.
हर वीकेंड से पहले क्राउड मैनेजमेंट की बैठक अनिवार्य-
अब हर वीकेंड से पहले क्राउड मैनेजमेंट की बैठक अनिवार्य होगी. पहले विशेष पर्व या बड़े आयोजनों के समय ही बैठकें होती थीं, लेकिन हाल के दिनों में सामान्य वीकेंड पर भी श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इसलिए अब एसडीएम, सीओ और एआरटीओ की बैठक नियमित रूप से होगी.
इस बैठक में विशेष तौर पर शटल सेवा, रूट डायवर्जन, पार्किंग और यातायात व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी. भीड़ बढ़ने पर भवाली और आसपास के क्षेत्रों से शटल सेवाएं संचालित की जाएंगी. इसमें केएमओयू और परिवहन विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी.
श्रद्धालुओं से प्रशासन की अपील-
प्रशासन का कहना है कि कैंची धाम आने वाले श्रद्धालु पहले से होटल की बुकिंग कराकर ही आएं. बिना बुकिंग के पहुंचकर होटल की तलाश करने से सड़क पर वाहनों की आवाजाही और भीड़ दोनों बढ़ती हैं. लिहाजा होटल बुकिंग की भी जांच की जाएगी.
बाइक और टैक्सी व्यवस्था पर भी सख्ती होगी-
बैठक में सामने आया कि कुछ मामलों में टैक्सी के रूप में बाइक का इस्तेमाल किया जा रहा है और निजी मोटरसाइकिलों को भी किराये पर चलाए जाने की शिकायतें मिली हैं. ऐसे मामलों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.
शिप्रा नदी की पवित्रता और सुरक्षा को लेकर सख्ती-
कैंची धाम से जुड़ी धार्मिक आस्था में शिप्रा नदी का विशेष महत्व है. कहते हैं कि एक बार भंडारे के समय जब घी खत्म हो गया तो बाबा नीम करौली ने अपने भक्तों से कहा कि जाओ शिप्रा नदी से तीन कनस्तर भरकर घी ले आओ, भक्त तीन कनस्तर पानी भर लाए और जब वह कढ़ाई में डाला गया तो घी बन गया और घी आने के बाद बाबा बोले कि जाओ अब शिप्रा नदी को उनका घी वापस कर आओ. प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कुछ लोग नदी में स्नान करने के साथ वहां पिकनिक जैसा माहौल बना रहे हैं. अब इस पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी. वन विभाग की ड्यूटी लगाई जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

होटल-होमस्टे में मनमानी कीमतों पर नजर-
दुकानदारों से रेट लिस्ट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने को कहा गया है और कीमतें उचित रखने के निर्देश दिए गए हैं. निर्धारित दरों से अधिक वसूली की शिकायत सही पाए जाने पर कार्रवाई होगी.
वहीं, आसपास के होटल और होमस्टे द्वारा अत्यधिक कीमत वसूलने की शिकायतों पर भी प्रशासन जांच करेगा. नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस अथवा संबंधित अनुमति पर कार्रवाई तक की जा सकती है.
कुल मिलाकर कैंची धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के बीच प्रशासन अब अस्थायी इंतजामों से आगे बढ़कर एक व्यवस्थित क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
कुमाऊँ कमिश्नर दीपक रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में रजिस्ट्रेशन से लेकर श्रद्धालुओं की संख्या की सीमा, मंदिर में अलग एंट्री-एग्जिट, नियमित ट्रैफिक बैठक, शटल व्यवस्था, अवैध बाइक टैक्सी पर कार्रवाई, शिप्रा नदी की निगरानी और होटल-होमस्टे की मनमानी कीमतों पर नियंत्रण जैसे कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रशासन अब भीड़ आने के बाद व्यवस्था संभालने के बजाय पहले से भीड़ का अनुमान लगाकर तैयारी करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. यही कैंची धाम जैसे तेजी से बढ़ते धार्मिक पर्यटन स्थल के लिए दीर्घकालिक क्राउड मैनेजमेंट की जरूरत भी है.
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