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Swami Premanand Maharaj: क्या हमें सभी भगवानों की उपासना करनी चाहिए? या सिर्फ एक ही भगवान हमारे लिए काफी है.. जानें बोले प्रेमानंद महाराज?

भगवान की पूजा करते समय कई बार लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर उन्हें क्या सभी भगवानों की पूजा करनी चाहिए? जानिए इसको लेकर स्वामी प्रेमानंद महाराज क्या कहते हैं.

प्रेमानंद महाराज के विचार प्रेमानंद महाराज के विचार

भक्ति का प्रारंभिक स्वरूप सभी देवी-देवताओं की आराधना से होता है. लेकिन क्या हमें सभी देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए या किसी एक को ही भजना चाहिए. इस पर स्वामी प्रेमानंद जी का कहना है कि प्रारंभ में हम शिव चालीसा, दुर्गा चालीसा, हनुमान चालीसा जैसे विविध आराधनाओं से भक्ति का मार्ग शुरू करते हैं. यह चरण हमें भगवान के नाम और रूपों की प्रियता में ले जाता है.

वे कहते हैं कि भक्ति का असली रंग तब आता है जब हमें सतगुरु की प्राप्ति होती है. सतगुरु द्वारा प्रदत्त नाम और उपास्य देव पर केंद्रित प्रेम से भक्ति गहराई तक पहुंचती है. उनका कहना है कि हम आराधना सबकी करते हैं, लेकिन प्यार सद्गुरुदेव के बताए हुए नाम और उपास्य देव पर है. 

भगवान के एक नाम और रूप में प्रेम की अनुभूति
भगवान के विविध नाम और रूपों की आराधना व्यर्थ नहीं है, लेकिन इसका फल तब मिलता है जब हम एक नाम और रूप में प्रेम की अनुभूति करते हैं. जैसे कि भगवती अंबा ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की. यह दिखाता है कि जब मन एक नाम और रूप में रम जाता है, तो भक्ति का असली रंग आता है.

जीवन में भक्ति का अंतिम चरण
जीवन का समय सीमित है और हमें अपने प्रभु के किसी एक नाम और रूप को पकड़कर उसमें डूब जाना चाहिए. प्रेमानंद महाराज ने गोस्वामी तुलसीदास और गोपीजनों के उदाहरण दिए, जिन्होंने अपने आराध्य देव में प्रेम की गहराई तक पहुंचने का मार्ग अपनाया.