Shivpuri Dham
Shivpuri Dham
सावन मास शुरू होते ही कोटा में भगवान भोलेनाथ की भक्ति अपने चरम पर पहुंच गई है. शहर के शिवालयों में सुबह से ही हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष गूंज रहे हैं. श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद ले रहे हैं. इसी आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है कोटा के थेगड़ा स्थित प्रसिद्ध शिवपुरी धाम, जहां स्वास्तिक आकार में स्थापित 525 शिवलिंग और भगवान पशुपतिनाथ की दिव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है.
सावन शुरू होते ही शिवपुरी धाम में रोजाना हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. विशेष रूप से रविवार और सोमवार को यहां प्रतिदिन 8 से 10 हजार श्रद्धालु दर्शन, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं. पूरे मंदिर परिसर में शिव महिम्न स्रोत, महामृत्युंजय जाप, रुद्रपाठ, भजन-कीर्तन और आरती से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो चुका है.
सनातन पुरी महाराज ने लिया था संकल्प
शिवपुरी धाम की सबसे बड़ी पहचान यहां स्थापित 525 शिवलिंग हैं. इन शिवलिंगों की स्थापना के पीछे भी एक अनोखी तपस्या जुड़ी हुई है. धाम के संत महेश पुरी महाराज बताते हैं कि यहां राणाराम पुरी बाबा की मुख्य समाधि है. उनके शिष्य परम सिद्ध सनातन पुरी महाराज ने इस स्थान की आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाया. बड़े गुरुजी राणाराम पुरी बाबा नेपाल से 525 शिवलिंगों का नक्शा लेकर आए थे. इसके बाद सनातन पुरी महाराज ने संकल्प लिया कि जब तक 525 शिवलिंगों की स्थापना पूरी नहीं होगी, तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे. इस संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने लगातार 12 वर्षों तक एक पैर पर खड़े रहकर कठोर तपस्या की और अन्न का त्याग किया. उनकी इसी कठिन साधना के बाद यहां 525 शिवलिंगों की स्थापना हुई, जो आज लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है.
धाम की धार्मिक विशेषता केवल 525 शिवलिंगों तक सीमित नहीं है. इनके मध्य में भगवान पशुपतिनाथ की दिव्य प्रतिमा विराजमान है. परिसर में सहस्त्रलिंग भी स्थापित है, जिसमें एक ही शिला पर अनेक शिवलिंग उकेरे गए हैं. इसके अलावा अष्टधातु से निर्मित शिवलिंग और लगभग 15 फीट ऊंचा तथा करीब 14 टन वजनी विशाल शिवलिंग भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं. ऊपर से देखने पर पूरा मंदिर परिसर स्वास्तिक के आकार में दिखाई देता है, जिसे सनातन संस्कृति में मंगल, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है.
सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व
महेश पुरी महाराज बताते हैं कि सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन मास में ही कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया. इसी कारण सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. उन्होंने बताया कि सावन के दौरान भगवान शिव का जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करने का विशेष फल मिलता है. श्रद्धालु बेलपत्र, भांग, धतूरा, आक के पुष्प, चंदन और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं. मान्यता है कि केवल एक बेलपत्र अर्पित करने से भी भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और श्रद्धापूर्वक की गई आराधना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
हर सोमवार को महा रुद्राभिषेक का आयोजन
सावन के प्रत्येक सोमवार को शिवपुरी धाम में महा रुद्राभिषेक का आयोजन किया जा रहा है. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान भोलेनाथ का विशेष अभिषेक किया जा रहा है. सुबह से देर शाम तक चलने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में हजारों श्रद्धालु भाग ले रहे हैं. प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह धाम सावन में आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का अद्भुत संगम बन गया है. धाम के अनुयायी निलेश ने बताया कि सावन शुरू होने के साथ ही दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, पार्किंग, पेयजल और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विशेष इंतजाम किए गए हैं.
कोटा-हाड़ौती ही नहीं बल्कि राजस्थान के विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं. पूरे सावन मास के दौरान हर दिन धार्मिक अनुष्ठान, रुद्रपाठ, महामृत्युंजय जाप, भजन-कीर्तन और विशेष आरती का आयोजन जारी रहेगा. शिवपुरी धाम में इन दिनों हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष लगातार गूंज रहे हैं. सावन की शुरुआत के साथ ही यह धाम एक बार फिर लाखों शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है, जहां तपस्या, परंपरा, सनातन संस्कृति और शिवभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है.