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सावन में खास है प्रयागराज का कोटेश्वर धाम, रावण वध के बाद ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति के लिए श्रीराम ने की थी शिव पूजा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति और भगवान शिव से क्षमा याचना के उद्देश्य से गंगा तट पर बड़ी संख्या में शिवलिंगों की स्थापना कर उनकी पूजा की. इसी कथा से प्रयागराज के शिवकुटी में बने कोटेश्वर धाम को जोड़ा जाता है.

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Koteshwar Dham Koteshwar Dham

सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही पूरे देश में भगवान शिव की आराधना और मंदिरों में जलाभिषेक का सिलसिला चल रहा है. शिवभक्त सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं. देशभर में भगवान शिव के अनेक प्राचीन और पौराणिक मंदिर हैं, लेकिन प्रयागराज में गंगा तट पर स्थित कोटेश्वर धाम का अपना अलग धार्मिक और पौराणिक महत्व माना जाता है.

कोटेश्वर धाम की क्या है मान्यता
प्रयागराज के शिवकुटी में गंगा किनारे के कोटेश्वर धाम सावन के महीने में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन जाता है. सावन के सोमवार को सुबह से ही भक्तों की भीड़ पहुंचने लगती है. श्रद्धालु गंगा स्नान और पूजन के बाद कोटेश्वर महादेव के शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं.

भगवान श्रीराम से है इस धाम का संबंध
कोटेश्वर धाम के बारे में धार्मिक मान्यता है कि इसका संबंध भगवान श्रीराम से है. पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीराम ने लंका में रावण का वध कर विजय प्राप्त की और अयोध्या लौटने से पहले प्रयागराज पहुंचे, तो उन्होंने मुनि भारद्वाज से आशीर्वाद लिया. मान्यता है कि मुनि भारद्वाज ने भगवान राम को बताया कि रावण ब्राह्मण कुल में जन्मा था और उसके वध के कारण उन पर ब्रह्महत्या दोष लगा है. इस दोष से मुक्ति के लिए भगवान राम को भगवान शिव की आराधना करने और शिवलिंगों की स्थापना कर पूजा-अर्चना करने का उपाय बताया गया.

भगवान राम ने ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति के लिए की थी पूजा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति और भगवान शिव से क्षमा याचना के उद्देश्य से गंगा तट पर बड़ी संख्या में शिवलिंगों की स्थापना कर उनकी पूजा की. इसी कथा से प्रयागराज के शिवकुटी में बने कोटेश्वर धाम को जोड़ा जाता है. स्थानीय धार्मिक मान्यता के मुताबिक भगवान राम ने गंगा तट पर रेत से एक करोड़ शिवलिंग बनाए और उनकी स्थापना कर भगवान शिव की आराधना की थी. कहा जाता है कि बाद में इन सभी शिवलिंगों को एक साथ करके एक शिवलिंग के रूप में प्राण-प्रतिष्ठित किया गया, जिसे कोटेश्वर महादेव के नाम से जाना गया.

भगवान राम द्वारा स्थापित है शिवधाम
इसी वजह से कोटेश्वर धाम को भगवान राम द्वारा स्थापित शिवधाम के रूप में श्रद्धा के साथ देखा जाता है. मंदिर के पुजारी और यहां आने वाले श्रद्धालु भी इस पौराणिक मान्यता को मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता बताते हैं. सावन के सोमवार को उमड़ते हैं श्रद्धालु सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. ऐसे में सावन के प्रत्येक सोमवार को कोटेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है. सुबह से ही भक्त मंदिर पहुंचकर भगवान शिव के शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं और बेलपत्र, पुष्प, दूध तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं.

भक्तों का मानना है कि भगवान शिव की सच्चे मन से आराधना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति आती है. यही वजह है कि स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग सावन के सोमवार को कोटेश्वर धाम पहुंचते हैं.

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