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माघ मेले में भक्ति का अनोखा रंग, इको-फ्रेंडली तरीके से हुई पूजा, फूलों से हुआ हवन

राम अर्चन पूजा की खासियत राम अर्चन पूजा भगवान राम की विशेष पूजा है, जिसमें केवल फूलों का ही इस्तेमाल होता है. न कोई अगरबत्ती, न हवन सामग्री. यहां तक कि हवन भी सिर्फ गुलाब के फूलों से किया गया.

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हाइलाइट्स
  • संगम तट पर अनोखी राम अर्चन पूजा

  • माघ मेले में दिखा इको-फ्रेंडली संदेश

प्रयागराज के संगम तट पर माघ मेला अपने पूरे रंग में रंगीन हो रहा है. कहीं भगवान राम की पूजा, कहीं मां गंगा की आराधना, तो कहीं कल्पवास में तुलसी पूजन ये सब नजारे चारों ओर बिखरे हैं. आज मेले में एक अनोखा रंग नजर आया, जब देवरहा बाबा के शिविर में राम अर्चन पूजा का आयोजन हुआ. पूरे कैंप को दो टन फूलों से सजाया गया जिधर नजर दौड़ाओ, फूल ही फूल. ऊंची अखंड ज्योति, कुटियां और हवन कुंड तक फूलों की चादर ओढ़े हुए थे.

राम अर्चन पूजा में केवल फूलों का ही इस्तेमाल
राम अर्चन पूजा की खासियत राम अर्चन पूजा भगवान राम की विशेष पूजा है, जिसमें केवल फूलों का ही इस्तेमाल होता है. न कोई अगरबत्ती, न हवन सामग्री. यहां तक कि हवन भी सिर्फ गुलाब के फूलों से किया गया. यह पूजा विगत कई वर्षों से देवरहा बाबा के शिष्य रामदास द्वारा आयोजित की जा रही है, जिसमें साधु-संत और स्थानीय भक्त बड़ी संख्या में शामिल होते हैं. फूलों से किया जाने वाला हवन इस पूजा का सबसे आकर्षक हिस्सा है. हर भक्त 'भगवान राम' मंत्रोच्चार के साथ गुलाब के फूल अर्पित करता है.

इको-फ्रेंडली तरीके से हुई पूजा
ये पूरी पूजा इको-फ्रेंडली तरीके से हुई, जो पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है.आयोजकों व भक्तों की प्रतिक्रियादेवरहा बाबा के शिष्य रामदास ने कहा, "यह हमारी वार्षिक परंपरा है. इस साल भी पारंपरिक रूप से फूलों से ही भगवान राम की पूजा की. पर्यावरण कार्यकर्ता बाहुबली राम ने जोड़ा, पूजा की परंपरा फूलों पर आधारित है.

हमने इसे इको-फ्रेंडली बनाकर प्रकृति को संरक्षित करने का संदेश दिया. मेले में आए भक्तों ने भी इस पूजा की खूब तारीफ की. एक भक्त बोले, "मेले के हर रंग देखे, लेकिन यह फूलों का रंग बिल्कुल अलग और सुंदर है. हवन तक फूलों से क्या बात है."

-आनंद राज की रिपोर्ट