Dahi-Chiwda or Khichdi
Dahi-Chiwda or Khichdi
Makar Sankranti: हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है. सूर्यदेव जब धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को है. इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद दही-चूड़ा और खिचड़ी खाने का रिवाज है. आइए जानते हैं मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा और खिचड़ी खाने के पीछे का असली वजह क्या है?
मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं दही-चूड़ा
मकर संक्रांति पर्व पर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में लोग बड़े ही चाव से दही और चूड़ा खाते हैं. दही और चूड़ा खाने में स्वादिष्ट तो लगता ही है, यह हमारे शरीर के लिए भी काफी फायदेमंद होता है. इसे आप चंद मिनटों में तैयार कर इसमें गुड़ या चीनी मिलाकर खा सकते हैं. आपको मालूम हो कि मकर संक्रांति पर्व को नई फसल के आगमन के रूप में भी मनाया जाता है. धान फसल की कटाई के बाद नया चूड़ा तैयार होता है. इससे सबसे पहले भगवान को समर्पित किया जाता है. इसके बाद चूड़ा में दही मिलाकर प्रसाद के रूप में परिवार संग मिलकर खाया जाता है.
सेहत के लिए फायदेमंद दही-चूड़ा
दही और चूड़ा को पेट के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. दही-चूड़ा खाने से पाचन तंत्र सही रहता है. दही-चूड़ा आसान से पच जाते हैं. दही-चूड़ा खाने से देर तक पेट भरा रहता है. ऐसे में इसे खाकर वजन घटाया जा सकता है. बस इसमें मीठा का ज्यादा इस्तेमाल न करें. दही एक प्रोबायोटिक है, जो हमारे पेट के गुड बैक्टीरिया को बढ़ाता है और पाचन को दुरुस्त रखता है. चूड़ा में कार्बोहाइड्रेट काफी होता है, जो शरीर को तुरंत एनर्जी देता है. दही-चूड़ा खाने से खून की कमी दूर होती है. दही में पाए जाने वाले कैल्शियम और प्रोटीन हड्डियों को मजबूत करते हैं.
कैसे बनाएं दही और चूड़ा
सबसे पहले दही, चूड़ा और गुड़ लें. आप गुड़ की जगह चीनी भी ले सकते हैं लेकिन गुड़ के साथ दही-चूड़ा खाने पर लाभ अधिक मिलता है. गुड़ की तासीर गर्म होती है. यह शरीर को अंदर से गर्माहट देता है. चूड़ा को सबसे पहले पानी से अच्छी तरह धो लें. इसके बाद इसे दो-तीन मिनट पानी में भिगोकर रख दें. इसके बाद पानी में छानकर चूड़े को बाहर निकाल दें. कुछ देर इसे ऐसे ही रहने दें. अब एक कटेरे या बाउल में दही लें. इसे हल्का ब्लैंड कर लें. इसके बाद इसमें गुड़ या चीनी डालकर मिला दें. आप कितना मीठा दही-चूड़ा खाना चाह रहे हैं उसी के अनुसार गुड़ या चीनी दही में डालें. इसके बाद एक प्लेट या बाउल लें. उसमें भीगा हुआ चूड़ा डालें. इसके बाद ऊपर से गुड़ या चीनी मिली हुई दही डालें. अब दही और चूड़ा को हाथ या चम्मच की मदद से मिला लें. इस तरह से दही-चूड़ा को आप खा सकते हैं. आपको मालूम हो कि कुछ लोग दही और चूड़ा में थोड़ा दूध भी डालकर खाते हैं. कुछ लोग दही और चूड़ा को और स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें कटे हुए काजू, बादाम और किशमिश भी मिलाते हैं.
मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने का महत्व
ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की शुरुआत बाबा गोरखनाथ के समय से हुई थी. खिलजी के आक्रमण के समय जब योगी भोजन नहीं बना पाते थे और भूखे रहते थे. उस समय बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और सब्जियों को एक साथ पकाकर एक पौष्टिक व्यंजन तैयार करने की सलाह दी, जिसे खिचड़ी कहा गया. यह कम समय में तैयार होने वाला ऊर्जा से भरपूर भोजन था. मकर संक्रांति पर खिचड़ी का विशेष धार्मिक महत्व है. ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाकर दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इस दिन खिचड़ी खाने से विशेष लाभ मिलता है. उत्तर भारत में गंगा स्नान करने के बाद खिचड़ी दान की परंपरा प्रचलित है. ऐसी मान्यता है कि इससे भगवान सूर्य प्रसन्न होते हैं और खिचड़ी दान करने वालों पर अपनी विशेष कृपा सालों भर बनाए रखते हैं. खिचड़ी दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
खिचड़ी का ग्रहों से संबंध
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार खिचड़ी का संबंध ग्रहों से भी होता है. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने से ग्रह काफी लाभ पहुंचाते हैं. खिचड़ी में सबसे अधिक चावल को डाला जाता है. चावल को चंद्रमा का प्रतिक माना गया है. चंद्रमा मन की शांति और शीतलता का कारक है. मकर संक्रांति पर काली उड़द की दाल की भी खिचड़ी बनाई जाती है. उड़द की दाल का संबंध शनि देव से है. मकर संक्रांति के दिन उड़द की दाल वाली खिचड़ी खाने से शनि दोष दूर होते हैं. खिचड़ी में हल्दी डाली जाती है. हल्दी का संबंध भगवान विष्णु और बृहस्पति ग्रह से होता है. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने से भाग्य और ज्ञान में वृद्धि होती है. खिचड़ी में नमक भी डाला जाता है. नमक को शुक्र ग्रह का प्रतीक माना जाता है, जो जीवन में सुख-समृद्धि लाता है. खिचड़ी में डाली जाने वाली गोभी, मटर और अदरक का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है.