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Gita Jayanti 2025: 1 या 2 दिसंबर, किस दिन है गीता जयंती, जानिए मोक्षदा एकादशी की महिमा और श्रीहरि की पूजा विधि

Gita Jayanti and Mokshada Ekadashi 2025: गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी एक ही दिन 1 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी. मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था. मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों का भी कल्याण होता है. आइए जानते हैं मोक्षदा एकादशी की महिमा और श्रीहरि की पूजा विधि.

Gita Jayanti 2025 (Photo: ITG) Gita Jayanti 2025 (Photo: ITG)

Gita Jayanti 2025: मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में श्रीकृष्ण भगवान ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था. इस दिव्य घटना की स्मृति में हर वर्ष गीता जयंती मनाई जाती है. मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी भी कहा जाता है. इस बार गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी 1 दिसंबर 2025 दिन सोमवार को मनाई जाएगी. इस दिन व्रत, पूजा और दान से मोक्ष प्राप्ति संभव है. आइए जानते हैं इस तिथि का महत्व और इसे मनाने की विधि.

मोक्षदा एकादशी का महत्व
मोक्षदा एकादशी का मुख्य उद्देश्य जीवन के बंधनों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति है. श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि पर अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था, जो आज भी मानव जीवन का मार्गदर्शन करता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और गीता पाठ करने से व्यक्ति को सांसारिक मोह-माया से मुक्ति मिलती है. ज्योतिष के अनुसार, यह तिथि अत्यंत शुभकारी है और इसे मोक्ष प्राप्ति का दिन माना जाता है.

व्रत और पूजा की विधि
मोक्षदा एकादशी के दिन व्रत रखना अत्यंत फलदायी माना गया है. इस दिन सुबह स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें. पीले कपड़े पहनें और श्रीकृष्ण को पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें. गीता का पाठ करें और 'ओम विष्णुवेनवाह' मंत्र का जाप करें. इस दिन अन्न का सेवन न करें और फलहार करें. रात में जागरण करें और भजन-कीर्तन करें.

दान और पुण्य
मोक्षदा एकादशी के दिन दान का विशेष महत्व है. गरीबों को भोजन कराना, ब्राह्मणों को दान देना और गऊ सेवा करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है. मान्यता है कि इस दिन किया गया दान सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है और उन्हें तृप्त करता है.

मोक्षदा एकादशी के दिन बरतें ये सावधानियां
इस दिन मांस, मदिरा और चावल का सेवन वर्जित है. मन को शांत और स्थिर रखें. गुस्से या बुराई की भावना से बचें. सच्चे मन से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें और उनकी कृपा प्राप्त करें.

श्रीकृष्ण की महिमा
मार्गशीर्ष मास श्रीकृष्ण को विशेष प्रिय है. श्रीकृष्ण को 16 कलाओं का अवतार माना जाता है. उनकी उपासना से जीवन की सभी समस्याओं का समाधान संभव है. श्रीकृष्ण के तीन प्रमुख अस्त्र सुदर्शन चक्र, बांसुरी और सम्मोहन धर्म की स्थापना में महत्वपूर्ण रहे हैं. मोक्षदा एकादशी का व्रत और पूजा विधि अपनाकर आप भी जीवन के बंधनों से मुक्ति पा सकते हैं. इस पवित्र तिथि पर श्रीकृष्ण की उपासना करें और उनकी कृपा से अपने जीवन को धन्य बनाएं.