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5 साल पहले भगवान शिव से मांगे थे दो बेटे, मन्नत पूरी हुई तो अब बेटे को लेकर कांवड़ यात्रा पर निकला पिता

इस बार की यात्रा को खास बनाने के लिए सोनू अपने 5 साल के बेटे को भी साथ लेकर निकले हैं. उनका बेटा पूरी यात्रा में उनके साथ रहेगा और काशी पहुंचकर पिता के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक करेगा.

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Kanwar Yatra Kanwar Yatra

भगवान शिव के प्रति आस्था और कांवड़ यात्रा की परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की एक भावुक तस्वीर प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट पर देखने को मिली. मध्य प्रदेश के रहने वाले सोनू अपने 5 साल के बेटे के साथ गंगाजल लेने प्रयागराज पहुंचे हैं. उनका कहना है कि उन्होंने भगवान शिव से दो बेटों की मन्नत मांगी थी, जो करीब पांच साल पहले पूरी हो गई. इसके बाद से उनकी शिवभक्ति और बढ़ गई. अब वह अपने बेटे को भी कांवड़ यात्रा की परंपरा और पूजा-पाठ का महत्व सिखाना चाहते हैं.

मन्नत पूरी होने के बाद हर साल उठा रहे कांवड़
सोनू बताते हैं कि वह मन्नत पूरी होने से पहले भी कांवड़ यात्रा करते थे. लेकिन जब भगवान शिव की कृपा से उनकी इच्छा पूरी हुई और उन्हें दो बेटे मिले, तब से वह लगातार श्रद्धा के साथ कांवड़ उठा रहे हैं. उनका मानना है कि भगवान के प्रति आस्था सिर्फ मन में रखने की नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की भी जिम्मेदारी है.

5 साल का बेटा भी करेगा जलाभिषेक
इस बार की यात्रा को खास बनाने के लिए सोनू अपने 5 साल के बेटे को भी साथ लेकर निकले हैं. उनका बेटा पूरी यात्रा में उनके साथ रहेगा और काशी पहुंचकर पिता के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक करेगा.

सोनू कहते हैं, 'आज की पीढ़ी को हमारी परंपराओं और संस्कृति के बारे में जानना चाहिए. इसलिए मैं अपने बेटे को साथ लेकर आया हूं, ताकि वह कांवड़ यात्रा का महत्व समझ सके और भविष्य में इस परंपरा को आगे बढ़ाए.'

80 किलो की कांवड़ लेकर निकले श्रद्धालु
सोनू अपने एक साथी के साथ कांवड़ यात्रा कर रहे हैं. दोनों के पास मिलाकर करीब 80 किलो की कांवड़ है. इसमें सोनू अकेले लगभग 50 किलो वजन की कांवड़ लेकर चल रहे हैं, जिसमें छह स्टील के गागरों में गंगाजल भरा गया है. उनके साथी के पास करीब 30 किलो गंगाजल वाली कांवड़ है. दोनों प्रयागराज से गंगाजल लेकर काशी के लिए रवाना हुए हैं, जहां भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे.

घाट पर बच्चों के साथ पहुंचे कई परिवार
प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट पर सिर्फ सोनू ही नहीं, बल्कि कई अन्य श्रद्धालु भी अपने छोटे बच्चों के साथ गंगाजल लेने पहुंचे. कुछ परिवारों ने अपने बेटों और बेटियों को भी छोटी कांवड़ उठवाई. इन श्रद्धालुओं का कहना है कि बचपन से ही बच्चों को धार्मिक परंपराओं और संस्कृति से जोड़ने से उनमें आस्था और संस्कार दोनों विकसित होते हैं.

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