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Navratri 2025: मथुरा के नरी सेमरी मंदिर में हुई अनोखी 'चादर आरती', जानिए इसकी खासियत

नरी सेमरी मंदिर में 'चादर आरती' एक पारंपरिक अनुष्ठान है, जो सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा है. इस आरती को करने का तरीका अनूठा और चमत्कारी माना जाता है. इस आरती में आटे से बने दीपक का उपयोग किया जाता है. मंदिर के पुजारी और धांधू भगत के परिजन सफेद सूती कपड़े (चादर) को चारों ओर से पकड़ लेते हैं.

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मथुरा नरी सेमरी मंदिर मथुरा नरी सेमरी मंदिर

नवरात्रि के पावन अवसर पर देशभर में देवी आराधना की धूम मची हुई है. लेकिन मथुरा से 26 किलोमीटर दूर स्थित नरी सेमरी मंदिर में एक अनोखी परंपरा देखने को मिली. यहां माता की 'चादर आरती' का आयोजन किया गया, जो केवल इसी मंदिर में होती है और इसकी मान्यता सैकड़ों वर्षों पुरानी है.

नरी सेमरी गांव में स्थित यह प्राचीन मंदिर नगरकोट वाली देवी (कांगड़ा देवी) से जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि माता नगरकोट वाली देवी के एक भक्त धांधू भगत ने अपनी भक्ति से उन्हें प्रसन्न किया और माता से आगरा चलने का आग्रह किया. माता ने सहमति दी लेकिन एक शर्त रखी- धांधू भगत आगे चलेंगे और माता उनके पीछे, लेकिन अगर वे पीछे मुड़कर देखेंगे तो माता वहीं स्थापित हो जाएंगी.

कहा जाता है कि जब धांधू भगत मथुरा के नरी गांव पहुंचे, तो जिज्ञासा में उन्होंने पीछे मुड़कर देख लिया. उसी क्षण माता वहीं स्थायी रूप से विराजमान हो गईं. तब से लेकर आज तक, यह मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है.

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क्या है अनोखी 'चादर आरती' ?
नरी सेमरी मंदिर में 'चादर आरती' एक पारंपरिक अनुष्ठान है, जो सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा है. इस आरती को करने का तरीका अनूठा और चमत्कारी माना जाता है. इस आरती में आटे से बने दीपक का उपयोग किया जाता है. मंदिर के पुजारी और धांधू भगत के परिजन सफेद सूती कपड़े (चादर) को चारों ओर से पकड़ लेते हैं. दीपक की तेज लौ को कपड़े के नीचे घुमाया जाता है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इस लौ से चादर नहीं जलती.

यह अद्भुत दृश्य देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां मांगी गई मुरादें जरूर पूरी होती हैं.

श्रद्धालुओं में उत्साह, शाम को फिर होगी आरती
आज इस अनूठी आरती का आयोजन शाम को फिर से किया जाएगा. मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई है, और भक्त माता के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं.

मंदिर के पुजारी के मुताबिक, "यह माता की पारंपरिक आरती है, जो धांधू भगत के वंशजों द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी की जा रही है. आटे से बने दीपक और सफेद चादर का यह अनुष्ठान मंदिर की खास पहचान है." इस अनोखी आरती और देवी माता की कृपा का अनुभव करने के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं. 

(मदन गोपाल शर्मा की रिपोर्ट)