प्रयागराज में फ्री रुद्राभिषेक की पूजा
प्रयागराज में फ्री रुद्राभिषेक की पूजा
सावन के पवित्र महीने में जब भगवान शिव की भक्ति अपने चरम पर होती है, तब प्रयागराज के नैनी अरैल घाट पर कुछ खास देखने को मिलता है. यहां पिछले कई सालों से एक अनूठी पहल की जा रही है. यह है फ्री रुद्राभिषेक कार्यक्रम, जहां पैसों की कोई बाधा नहीं है. न जात-पात का फर्क, न अमीरी-गरीबी का भेद, यहां सिर्फ भक्ति और समर्पण मायने रखता है. हर दिन गंगा तट पर शिव भक्त जुटते हैं. कोई गंगा के बीच बने चबूतरे पर बैठकर शिवलिंग बनाता है, तो कोई तट पर बैठकर मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक करता है. इस दौरान घाट पर भक्तिमय माहौल बना रहता है और श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना में लीन नजर आते हैं.
पूजा सामग्री भी मिलती है मुफ्त
इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि अगर किसी श्रद्धालु के पास पूजा सामग्री नहीं है, तो उसे इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है. आयोजक संस्था की ओर से हर श्रद्धालु को पूजा की पूरी सामग्री नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है. यानी भक्तों को बस श्रद्धा लेकर आना है और भोलेनाथ के चरणों में खुद को समर्पित करना है.
आर्थिक परेशानी के चलते कोई न छूटे रुद्राभिषेक से
इस नेक काम की शुरुआत एक शिक्षक और एक स्थानीय धार्मिक संस्था ने की है. इसका मकसद यही है कि कोई भी शिव भक्त केवल आर्थिक अभाव की वजह से रुद्राभिषेक करने से वंचित न रह जाए. आज यह कार्यक्रम इतना लोकप्रिय हो चुका है कि सिर्फ प्रयागराज ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से भी लोग अरैल घाट पर रुद्राभिषेक करने पहुंच रहे हैं. शंभू सरकार पिछले कई सालों से शिवपुरी रुद्राभिषेक का कार्यक्रम करवाता आ रहा है. इसमें काफी संख्या में शिव भक्ति में आस्था रखने वाले लोग हिस्सा लेते हैं.
सावन शुरू होते ही बढ़ा भक्तों का उत्साह
सावन की शुरुआत हो चुकी है और इसके साथ ही भक्तों का उत्साह भी और बढ़ गया है. पूरे सावन के हर दिन यहां फ्री रुद्राभिषेक करवाया जाता है. इसके अलावा पूरे महीने हर सोमवार के साथ-साथ पूरे सावन में काफी संख्या में श्रद्धालु यहां उमड़ते हैं. अरैल घाट पर रुद्राभिषेक के दौरान "ओम नमः शिवाय" और "हर हर महादेव" के जयकारों से पूरा घाट गूंज उठता है. कुछ श्रद्धालु अपने साथ दूध, बेलपत्र और भस्म लेकर आते हैं, तो कुछ गंगाजल से ही भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते हैं. सावन के पूरे महीने यह धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का खास केंद्र बना हुआ है.
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