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Mahalakshmi Vrat 16 Bol Story: महालक्ष्मी व्रत में सुनाई जाने वाली '16 बोल' की कथा का रहस्यमयी स्थल मिला, जानिए 1108 रुद्री शिवलिंग का क्या है रहस्य

महालक्ष्मी व्रत की '16 बोल' की कथा में वर्णित गुमनाम स्थान मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील में मिला है. यहां स्थित 500 साल पुराने नीलकंठ धाम में 1108 रुद्री का प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, जहां 1 लोटा जल चढ़ाने से 1108 लोटे जल का पुण्य लाभ मिलता है.

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रहस्यमयी शिवलिंग रहस्यमयी शिवलिंग

महालक्ष्मी व्रत यानी गज पूजन के दौरान महिलाओं को पुरोहित द्वारा 16 बोल की एक खास कथा सुनाई जाती है. इस कथा में एक ऐसे स्थान का जिक्र आता है, जहां एक लोटा जल चढ़ाने पर 1108 लोटा जल चढ़ाने का पुण्य फल और एक बेलपत्र चढ़ाने पर 1108 बेलपत्र चढ़ाने का पुण्य फल मिलने की मान्यता है. यह बात सुनने में चमत्कारी लगती है, लेकिन इस स्थान के बारे में स्थानीय लोगों के बीच आज भी मान्यता है. आजतक की टीम ने इस कहानी में बताए गए गुमनाम स्थान को खोज निकाला है. इसी कथा में बताए गए स्थान की तलाश में टीम रायसेन जिले के गैरतगंज तहसील पहुंची. यहां नीलकंठ धाम स्थित है, जहां 1108 रुद्री का प्राचीन शिवलिंग है.

500 साल से ज्यादा पुराना है नीलकंठ धाम
मान्यता के अनुसार, इस शिवलिंग पर एक लोटा जल चढ़ाने से 1108 लोटा जल के अभिषेक का पुण्य लाभ मिलता है. वहीं, एक बेलपत्र चढ़ाने पर 1108 बेलपत्र चढ़ाने का पुण्य लाभ मिलने की मान्यता है. यह स्थान 500 साल से अधिक प्राचीन बताया जाता है. कहा जाता है कि राजा मगर सेन ने अपनी पत्नियों के पूजन के लिए भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की थी. इसके बाद यहां स्वयंभू शिवलिंग स्थापित हुआ. मान्यता है कि बाद में एक संत को स्वयं भगवान भोलेनाथ ने स्वप्न में दर्शन देकर बताया कि वे यहां मौजूद हैं. इसके बाद संत ने यहां दिव्य शिवलिंग को दोबारा स्थापित कराया. इसी स्थान को आज नीलकंठ धाम के नाम से जाना जाता है.

पाटन गांव में मिलते हैं पुराने महल के अवशेष
पुराणों के अनुसार, माता कुंती ने भी महालक्ष्मी व्रत में हाथी का पूजन किया था और 16 बोल की यही कहानी सुनी थी. कथा में जिस परपट्टन गांव का जिक्र आता है, वह अब पाटन गांव के नाम से जाना जाता है. पाटन गांव की बुजुर्ग महिलाएं 16 बोल की कहानी सुनाते हुए बताती हैं कि यही वह स्थान है. गांव के ऊपर पठार यानी पहाड़ पर राजा मगर सेन के महल के अवशेष भी मौजूद बताए जाते हैं.

सावन में कांवड़ लेकर पहुंचते हैं भक्त
श्रावण माह में भक्त नर्मदा नदी का जल कांवड़ में भरकर यहां लाते हैं और शिवलिंग पर चढ़ाते हैं. मान्यता है कि इस स्थान से कोई खाली हाथ नहीं लौटता और यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

नागपंचमी और शिवरात्रि पर लगता है तांता
नीलकंठ धाम में नागपंचमी, बसंतपंचमी और शिवरात्रि के अवसर पर भक्तों का तांता लगा रहता है. यहां सिद्ध धूनी भी है, जिसमें हमेशा अग्नि जलती रहती है. भक्तों का कहना है कि यही वह गुमनाम स्थान है, जिसकी कहानी तो लोग सुनते हैं, लेकिन इसके वास्तविक स्थान के बारे में स्थानीय लोगों को ही जानकारी है.
 

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