Unique Shiva Devotee in Saharanpur
Unique Shiva Devotee in Saharanpur
सावन के महीने में कांवड़ यात्रा जारी है. शिव भक्त गंगा सहित पवित्र नदियों से कांवड़ में जल उठाकर शिवलिंग पर चढ़ा रहे हैं. कांवड़िया मार्ग हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गूंज रहे हैं. हर तरफ आस्था की बयार बह रही है. सहारनपुर से होकर गुजर रही कांवड़ यात्रा में शिवभक्तों की अलग-अलग तरह की कांवड़ देखने को मिल रही हैं. इसी बीच अंबाला सिटी के रहने वाले 45 वर्षीय बृजलाल भोले की 3 किलो की घंटी कांवड़ लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
भोले का नंदी कहकर बुलाते हैं लोग
बृजलाल पिछले 10 साल से अपनी कमर पर करीब ढाई से तीन किलो की पीतल की घंटी बांधकर कांवड़ यात्रा कर रहे हैं. घंटी की आवाज के कारण अब लोग उन्हें भोले का नंदी कहकर बुलाते हैं. बृजलाल बताते हैं कि वह महज 10 साल की उम्र से अपने पिता के साथ कांवड़ यात्रा कर रहे हैं. करीब 10 साल पहले उन्हें सूरदास जी ने घंटी कांवड़ की परंपरा के बारे में बताया था. बृजलाल के मुताबिक वह सूरदास जी के साथ नीलकंठ से लौट रहे थे, तभी सूरदास जी ने कहा कि अगर रास्ते में तुम खो गए तो मैं तुम्हें कैसे ढूंढ पाऊंगा. इसके बाद उन्होंने बृजलाल की कमर में घंटी बांध दी. उनका कहना था कि जैसे नंदी के गले में घंटी होती है, उसी तरह यह घंटी भी उनकी पहचान बनेगी.
इसी तरह करते रहेंगे कांवड़ यात्रा
उस समय से बृजलाल लगातार घंटी कांवड़ लेकर यात्रा कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह घंटी अब उनकी पहचान बन चुकी है और घरवालों को भी इसकी आवाज से पता चल जाता है कि वह कहां हैं. बृजलाल कहते हैं कि उन्हें घंटी बांधने में कोई परेशानी नहीं होती, बल्कि उन्हें इससे आनंद मिलता है. गुरु से मिली इस घंटी कांवड़ को लेकर उनका संकल्प है कि जब तक जीवन है, वह इसी तरह भोलेनाथ की कांवड़ यात्रा करते रहेंगे.