Sankashti Chaturthi 2026
Sankashti Chaturthi 2026
हिंदू धर्मशास्त्रों के मुताबिक हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा-अर्चना की जाती है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि सकष्टी चतुर्थी के दिन विधि-विधान से व्रत रखने पर सभी संकट दूर होते हैं. भगवान गणेश की कृपा से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है. संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से आर्थिक परेशानी दूर होती है. करियर में सफलता मिलती है. स्वास्थ्य बेहतर रहता है. इस व्रत से सारे मनोरथ पूरे होते हैं. इस व्रत को करने से संतान की भी प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं इस दिन विद्या-बुद्धि, नौकरी, शादी और मकान के लिए कैसे भगवान गणपति को प्रसन्न कर सकते हैं?
कब से शुरू होगी चतुर्थी तिथि
पंचांग के मुताबिक चतुर्थी तिथि का शुभारंभ 3 जुलाई 2026 को सुबह 11:21 बजे होगा और इसका समापन 4 जुलाई 2026 को दोपहर 12:40 बजे होगा. उदया तिथि के मुताबिक संकष्टी चतुर्थी का व्रत 3 जुलाई 2026, दिन शुक्रवार को रखा जाएगा.
संकष्टी चतुर्थी के दिन ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा
1. सूर्योदय के पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
2. इस दिन पूरा दिन का उपवास रखा जाता है. शाम की पूजा के बाद भोजन ग्रहण करते हैं.
3. स्नान करने के बाद पूजा स्थल को साफ करके भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
4. भगवान गणेश को दूर्वा, अक्षत और दीप अर्पित करें.
5. भगवान गणेश को मोदक, लड्डू या गुड़-चने का भोग लगाएं.
6. ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जप करें. इस दिन गणेश जी कथा सुने.
7. रात्रि में चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्घ्य दें.
8. यदि बादल के चलते चंद्रमा नहीं दिखाई देते हैं तो पंचाग के हिसाब से चंद्रोदय के समय में पूजा कर लें.
9. फिर भगवान गणेश की आरती करें और चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करें.
10. अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन या दान दें.
क्या है संकष्टी चतुर्थी की कथा
संकष्टी चतुर्थी की अनेकों कथाएं पुराणों में हैं लेकिन हम आपको वह कथा बता रहे हैं जो सबसे ज्यादा महत्ता रखती है. संकष्टी की कथा कहती है कि एक बार मां पार्वती और भगवान शंकर चौसर खेल रहे थे. हार जीत के निर्णय के लिए माता ने एक मिट्टी के बालक के पुतले को जीवित कर दिया और उसे निर्णय का काम सौंपा. कई बार के खेल में हर बार माता जीतती रहीं लेकिन एक बार बालक के मुख से भूल वश विजेता के रूप में भगवान शिव का नाम निकल गया तो माता ने बालक को अपाहिज होने का श्राप दे दिया. क्रोध शांत होने पर बालक ने श्राप का प्रायश्चित पूछा तो मां ने कहा गणेश के संकष्टी व्रत करने से मेरा श्राप खत्म हो जागा. बालक ने कुछ कन्याओं को ये व्रत करते देखा तो उसका विधान पूछा. व्रत के कुछ समय बाद ही गणपति बालक से प्रसन्न हुए और दर्शन देकर उसके पैर को ठीक कर दिया. बालक ये बात बताने कैलाश पहुंचा, लेकिन माता पार्वती कुछ रुष्ट होकर भगवान शिव से दूर कैलाश छोड़ चुकी थीं. भगवान शंकर ने श्राप मुक्ति की कथा पूछी तो बालक ने पूरी कथा सुनाई. तब भगवान शिव ने भी संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया. व्रत करते ही मां स्वतः ही कैलाश वापस आ गई. इस तरह ये कथा ये बताती है कि गणेश व्रत किस तरह हमारी मनोकामना पूरी होती है और सारे संकट दूर होते है.
विद्या-बुद्धि पाने के लिए क्या करें
1. पीले वस्त्र धारण करके भगवान गणेश की पूजा करें.
2. भगवान गणेश को पीली चीजें और पीला रेशम का धागा अर्पित करें.
3. ॐ गं गणपतये नमः का यथाशक्ति जप करें.
4. भगवान गणेश से विद्या बुद्धि प्राप्ति की प्रार्थना करें.
5. अर्पित किया हुआ धागा अपनी कलाई में माता-पिता या गुरु से बंधवा लें.
संतान प्राप्ति के लिए करें ये उपाय
1. भगवान गणेश को फलों की माला अर्पित करें.
2. इसके बाद संतान गणपति स्रोत का पाठ करें.
3. ॐ उमापुत्राय नमः का 108 बार जाप करें.
4. अर्पित किए हुए फलों की माला व फल बच्चों में बांट दें.
5. ये प्रयोग गणेश महोत्सव में लगातार तीन दिन करें.
मनचाहे विवाह के लिए क्या उपाय करें
1. भगवान गणेश का सिन्दूर से शृंगार करें.
2. भगवान गणेश को पीले वस्त्र, पीले फूल और मोदक अर्पित करें.
3. ॐ विघ्नहत्रे नमः मंत्र का 108 बार जाप करें.
4. इसके बाद उस पीले वस्त्र को सहेज कर अपने पास रख लें.
मकान बनाने के लिए क्या उपाय करें
1. भगवान गणेश को लाल फूलों की माला अर्पित करें.
2. लाल फल, लाल वस्त्र व ताम्बे का एक सिक्का अर्पित करें.
3. ॐ सर्वसौख्यप्रदाय नमः का 108 बार जाप करें.
4. लाल वस्त्र में सिक्का बांधकर अपने पास रख लें.
नौकरी पाने के लिए क्या उपाय करें
1. भगवान गणेश को उतने ही लड्डू चढ़ाएं जितनी आपकी उम्र है.
2. हर लड्डू के साथ कहें- ॐ नमो भगवते लम्बोदराय.
3. एक लड्डू स्वयं खा लें और बाकी लोगों में बांट दें.