scorecardresearch

त्रिशूल हो या जटाओं में धारण की गई गंगा हो… या फिर भस्म और गले में लिपटे सर्प हो, जानें महादेव से जुड़ी हर चीज का रहस्य

SAWAN 2022: भोलेनाथ से जुड़ी हर बात चमत्कारी है और फिर उनके आभूषण का तो क्या ही कहना. आदि और अनंत से परे महादेव की कृपा जिस भी भक्त पर पड़ती है उसे संसार में फिर कोई बाधा रोक नहीं सकती. लेकिन भगवान शिव जो भी धारण करते हैं उसका अपना रहस्य है.

LORD SHIVA LORD SHIVA
हाइलाइट्स
  • भगवान शिव इस दुनिया के सारे आकर्षण से मुक्त हैं

  • शिव को प्रिय है डमरू

यूं तो भोलेनाथ को प्रसन्न करना बहुत आसान है. जरा सी भक्ति से ही देवाधिदेव प्रसन्न हो जाते हैं  और अपने भक्तों पर दिल खोलकर कृपा बरसाते हैं. महादेव का स्वरूप जितना सादा है उनसे जुड़ी बात उतनी ही रहस्यमयी है. भगवान शिव से जुड़ी हर बात का अपना रहस्य है. फिर चाहे वह त्रिशूल और डमरू हो, उनका प्रिय चंद्रमा हो. जटाओं में धारण की गई गंगा हो या फिर  भस्म और गले में लिपटे सांप ही क्यों न हों. इसी कड़ी में चलिए जानते हैं कि आखिर महादेव की प्रिय वस्तुएं क्या हैं और जानेंगे इनका महत्व- 

1.  रुद्राक्ष का महत्व

रुद्राक्ष का अर्थ है रूद्र का अक्ष. रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के अश्रुओं से हुई है. रुद्राक्ष को प्राचीन काल से आभूषण के रूप में, सुरक्षा के लिए, ग्रह शांति के लिए धारण किया जाता है. आध्यात्मिक लाभ के लिए भी रुद्राक्ष प्रयोग किया जाता रहा है. हालांकि, मुख्य रूप से 17 प्रकार के रुद्राक्ष पाए जाते हैं. लेकिन 12 मुखी रुद्राक्ष विशेष रूप से प्रयोग में आते हैं

रुद्राक्ष धारण करने के नियम- रुद्राक्ष कलाई , कंठ और ह्रदय पर धारण किया जा सकता है. इसे कंठ प्रदेश तक धारण करना सर्वोत्तम माना जाता है. इसके अलावा कलाई में बारह, कंठ में छत्तीस और ह्रदय पर एक सौ आठ दानों को धारण करना चाहिए. रुद्राक्ष का एक दाना भी धारण कर सकते हैं. लेकिन ये दाना ह्रदय तक होना चाहिए और लाल धागे में होना चाहिए.

रुद्राक्ष धारण करने का सबसे अच्छा समय- कहते हैं रुद्राक्ष धारण करने वाले की रक्षा दशों दिशाओं में महादेव करते हैं और सावन में तो रुद्राक्ष पहनना और भी शुभकारी है क्योंकि सावन का महीना महादेव को अति प्रिय है. ज्योतिष के जानकारों की अगर मानें तो रुद्राक्ष को कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को या किसी भी सोमवार को धारण कर सकते हैं. फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी यानि शिवरात्री को रुद्राक्ष धारण करना सबसे उत्तम होता है. रुद्राक्ष धारण करने के पूर्व उसे शिव जी को समर्पित करना चाहिए. इसके अलावा जो रुद्राक्ष धारण करें उसी माला या रुद्राक्ष पर मंत्र जाप करना चाहिए

2. शिव को प्रिय है डमरू

 भगवान शिव ही नृत्य और संगीत के प्रवर्तक हैं. शिव जी के डमरू में न केवल सातों सुर हैं बल्कि उसके अन्दर वर्णमाला भी है. शिव जी का डमरू बजाना आनंद और मंगल का प्रतीक है. वे डमरू बजाकर भी खुश होते हैं और डमरू सुनकर भी. नित्य अगर घर में शिव स्तुति डमरू बजाकर की जाय तो घर में कभी अमंगल नहीं होता. महादेव के डमरू में सातों सुर समाहित है.

3. शिव के त्रिशूल का रहस्य

दुनिया की कोई भी शक्ति हो - दैहिक , दैविक या भौतिक , शिव के त्रिशूल के आगे नहीं टिक सकती. शिव का त्रिशूल हर व्यक्ति को उसके कर्म के अनुसार दंड देता है. घर में सुख समृद्धि के लिए , मुख्य द्वार के ऊपर बीचों बीच त्रिशूल लगायें या बनायें. त्रिशूल आकृति तभी धारण करें , जब आप का मन, वचन और कर्म पर पूर्ण नियंत्रण हो.

4. भोलेनाथ के भस्म का रहस्य

भगवान शिव इस दुनिया के सारे आकर्षण से मुक्त हैं. उनके लिए ये दुनिया , मोह-माया , सब कुछ राख से ज्यादा कुछ नहीं है. सब कुछ एक दिन भस्मीभूत होकर समाप्त हो जाएगा , भस्म इसी बात का प्रतीक है. शिव जी का भस्म से भी अभिषेक होता है, जिससे वैराग्य और ज्ञान की प्राप्तिहोती है. घर में धूप बत्ती की राख या कंडे की राख से, शिव जी का अभिषेक कर सकते हैं. परंतु महिलाओं को भस्म से अभिषेक नहीं करना चाहिए.

5. शिव के चंद्रमा का रहस्य

समुद्र मंथन में निकले विष को शिव जी ने ग्रहण किया था. विष की ज्वाला को शांत करने के लिए उन्होंने माथे पर चंद्रमा को धारण किया. चंद्रमा धारण किए हुए शिव जी की पूजा से अनुकूल ग्रहों की शक्ति बढ़ती है. इसीलिए कहा जाता है कि शाम को पूर्व दिशा को ओर मुंह करके पूजा करें। प्रभु शिव का दूध से अभिषेक करें. 

6. गंगाधर शिव का रहस्य

महादेव ने राजा सगर के पुत्रों की मुक्ति,लोक कल्याण के लिए गंगा को सिर पर धारण किया. गंगा को धारण किए गए शिव जी के पूजन से पितृदोष से मुक्ति मिलती है. विद्या, बुद्धि और कला के क्षेत्र में सफलता मिलती है. 'ऊं गंगा विष्णु' का 3 बार जाप करते हुए आचमन करें. पूजा में लाल रंग के आसन का प्रयोग करें. इसके साथ ज्योतिष के मुताबिक, ईशान कोण की ओर मुंह करके, 'ऊं रुद्राय नम:' का 5 माला जाप करें. धतूरे के पुष्पों से गंगाधर का पूजन करें. धार्मिक पुस्तकों का दान करें, विद्यार्थियों की पढ़ाई में मदद करें. 
 
ये भी पढ़ें