Shivling Abhishek
Shivling Abhishek
भगवान शिव को समर्पित सावन का पावन महीना आज से शुरू हो गया है और 28 अगस्त तक चलेगा. हिंदू धर्म में श्रावण मास को बेहद शुभ और पुण्यदायी माना जाता है. मान्यता है कि इस पूरे महीने भगवान भोलेनाथ की सच्चे मन से पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही वजह है कि सावन शुरू होते ही देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगती है. भक्त गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
सावन का महीना क्यों है इतना खास?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है. इस दौरान की गई शिव उपासना का फल कई गुना अधिक मिलता है. मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की आराधना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, ग्रह दोष शांत होते हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है. अविवाहित युवक-युवतियां मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए भी सावन सोमवार का व्रत रखते हैं.
सावन पर बन रहे ये नक्षत्र
सावन के पहले दिन श्रवण नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है, जो 29 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 37 मिनट से शुरू होकर 30 जुलाई को शाम 5 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. वहीं आयुष्मान योग 29 जुलाई को रात 11 बजकर 57 मिनट से 31 जुलाई को रात 12 बजकर 4 मिनट तक रहेगा. इसके बाद सौभाग्य योग 30 जुलाई को रात 12 बजकर 4 मिनट से 31 जुलाई को रात 11 बजकर 53 मिनट तक रहेगा. इन शुभ संयोगों में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी माना गया है.
शिव पूजा का शुभ मुहूर्त
यदि आप सावन के पहले दिन भगवान शिव की पूजा करने जा रहे हैं, तो पूजा का शुभ समय सुबह 5 बजकर 28 मिनट से शाम 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक, विजय मुहूर्त शाम 4 बजकर 28 मिनट से शाम 5 बजकर 29 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त रात 9 बजकर 32 मिनट से रात 9 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. इन शुभ मुहूर्तों में शिवलिंग का जलाभिषेक और पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है.
ऐसे करें भोलेनाथ की पूजा
सावन में सुबह स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनकर भगवान शिव का ध्यान करें. इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल से जलाभिषेक करें. फिर दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें. पूजा के दौरान बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, सफेद चंदन और फल अर्पित करें. इसके बाद 'ॐ नमः शिवाय' और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें तथा शिव आरती के साथ पूजा पूरी करें.
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
सावन में भगवान शिव को केवल ताजे बेलपत्र ही अर्पित करें. शिवलिंग पर हल्दी, केतकी का फूल और तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाने चाहिए. ऐसा करने से पूजा विफल हो जाती है और भगवान शिव के क्रोध का भाग बनना पड़ सकता है. पूजा के दौरान मन में किसी के प्रति द्वेष या नकारात्मक भावना न रखें. इस महीने सात्विक भोजन करें और जरूरतमंदों की सहायता करना भी शुभ माना जाता है.
सावन में मिलेगा मनवांछित फल
धार्मिक मान्यता है कि सावन के पूरे महीने श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों पर भोलेनाथ विशेष कृपा बरसाते हैं. इससे विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती है, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी लाभ मिलने की मान्यता है. यही कारण है कि सावन का महीना शिवभक्तों के लिए पूरे वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है.
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