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सावन की आखिरी सोमवारी पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, हर-हर महादेव से गूंजे धाम, कहीं भस्म आरती तो कहीं कांवड़ियों की कतार

वाराणसी में बाबा काशी विश्वनाथ का मंगला आरती से पहले विशेष श्रृंगार किया गया. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुजारियों ने मंगला आरती की. दूसरी ओर रात से ही दर्शन के इंतजार में कतार में खड़े कांवड़ियों ने सुबह बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए और जलाभिषेक किया.

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Shiva Temple Shiva Temple
हाइलाइट्स
  • देशभर के प्रमुख शिव मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़

  • महाकाल से काशी विश्वनाथ तक भक्तों ने किया जलाभिषेक

सावन की चौथी और अंतिम सोमवारी पर सोमवार को देशभर के शिव मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. सुबह से ही सोमनाथ, महाकालेश्वर, काशी विश्वनाथ, बाबा बैद्यनाथ, गरीबनाथ धाम, लोधेश्वर महादेव, सिंहेश्वरनाथ और थानेश्वर स्थान समेत प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं. मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंजते रहे. कांवड़ियों ने भी अलग-अलग स्थानों से गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया. भीड़ को देखते हुए कई जगह पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए.

महाकाल में रात से कतार, तड़के हुई भस्म आरती
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में अंतिम सोमवारी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. भस्म आरती में शामिल होने के लिए रात 12 बजे से ही मंदिर के बाहर भक्तों की कतार लगनी शुरू हो गई थी. तड़के ढाई बजे मंदिर के पट खुले. सबसे पहले भगवान महाकाल को हरिओम जल अर्पित किया गया. इसके बाद भस्म आरती हुई. भगवान का दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से पंचामृत अभिषेक किया गया. इसके बाद भांग और सूखे मेवों से श्रृंगार हुआ. अंत में भगवान को भस्म अर्पित की गई. इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु आरती और श्रृंगार के दर्शन कर भाव-विभोर नजर आए.

काशी विश्वनाथ में कांवड़ियों पर हुई पुष्पवर्षा
वाराणसी में बाबा काशी विश्वनाथ का मंगला आरती से पहले विशेष श्रृंगार किया गया. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुजारियों ने मंगला आरती की. दूसरी ओर रात से ही दर्शन के इंतजार में कतार में खड़े कांवड़ियों ने सुबह बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए और जलाभिषेक किया. मंदिर में प्रवेश से पहले कांवड़ियों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया.

सोमनाथ से हरिद्वार तक गूंजा हर-हर महादेव
गुजरात के सोमनाथ में भी हजारों श्रद्धालु प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव के दर्शन के लिए पहुंचे. सुबह से मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र जय सोमनाथ और हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहा. पुलिस और सोमनाथ ट्रस्ट के अधिकारी-कर्मचारी सुरक्षा और व्यवस्था संभालते नजर आए. हरिद्वार के कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भी सुबह से श्रद्धालुओं की कतार लगी रही. भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया. इसे भगवान शिव की ससुराल के रूप में भी विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है.

देवघर और बिहार के मंदिरों में भी उमड़ी भीड़
देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में अंतिम सोमवारी पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी. मान्यता के अनुसार सावन की सोमवारी पर शिवलिंग का जलाभिषेक विशेष फलदायी माना जाता है. मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ धाम में भी हजारों कांवड़ियों और श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया. कई कांवड़िए सारण के पहलेजा घाट से करीब 72 किलोमीटर पैदल चलकर गंगाजल लेकर यहां पहुंचे. सहरसा के मटेश्वरधाम, मधेपुरा के बाबा सिंहेश्वरनाथ और समस्तीपुर के थानेश्वर स्थान मंदिर में भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे. थानेश्वर स्थान में महिलाओं की संख्या भी काफी रही. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस, मजिस्ट्रेट और स्थानीय वॉलंटियर तैनात रहे.

लखीसराय में तीसरी सोमवारी की घटना के बाद कड़ी निगरानी
लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में तीसरी सोमवारी को हुई भगदड़ की घटना के बाद अंतिम सोमवारी पर प्रशासन खास तौर पर अलर्ट रहा. डीएम शैलेन्द्र कुमार और एसपी प्रेरणा कुमार समेत कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे. श्रद्धालुओं के लिए अर्घा सिस्टम की व्यवस्था की गई. जगह-जगह मजिस्ट्रेट और दंडाधिकारी तैनात किए गए और सीसीटीवी से भीड़ पर नजर रखी गई. अधिकारी लगातार श्रद्धालुओं से कतार में रहकर जलाभिषेक करने की अपील करते रहे.

लोधेश्वर और भोजेश्वर में भी भक्तों का रेला
बाराबंकी के लोधेश्वर महादेव मंदिर में आखिरी सोमवारी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. बुंदेलखंड के उरई-जालौन और झांसी समेत कई जिलों से भी भक्त यहां पहुंचे. मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंजता रहा. वहीं, भोजपुर के ऐतिहासिक भोजेश्वर महादेव मंदिर में भी विशेष पूजा और श्रृंगार किया गया. 11वीं शताब्दी का यह मंदिर अपनी विशाल शिवलिंग और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है.

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