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रक्षाबंधन पर इस बार नहीं रहेगा भद्रा का साया, पूरे दिन बांध सकेंगे राखी, कालकाजी पीठाधीश्वर ने बताया शुभ समय

रक्षाबंधन शुक्रवार को मनाया जाना है जिनकी धूम चारों तरफ देखी जा रही हैं. बाजारों में जहां महिलाएं अपने भाइयों के लिए राखी खरीदती नजर आ रही हैं तो वहीं रक्षाबंधन से पहले मेहंदी लगवाती भी नजर आ रही हैं.

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Raksha Bandhan Raksha Bandhan
हाइलाइट्स
  • रक्षाबंधन का पर्व सावन महीने की पूर्णिमा को

  • पूरे दिन मनाया जा सकेगा रक्षाबंधन

रक्षाबंधन को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ गई है. बहनें अपने भाइयों के लिए तरह-तरह की राखियां खरीद रही हैं. वहीं, पर्व से पहले मेहंदी लगवाने को लेकर भी महिलाओं और युवतियों में उत्साह नजर आ रहा है. घरों में भी रक्षाबंधन की तैयारियां शुरू हो गई हैं. इस बीच राखी बांधने के शुभ समय को लेकर भी लोगों में उत्सुकता है.

पूरे दिन मनाया जा सकेगा रक्षाबंधन
कालकाजी मंदिर के पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया कि रक्षाबंधन का पर्व सावन महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है. इस वर्ष सावन पूर्णिमा 28 अगस्त, शुक्रवार को पड़ रही है. खास बात यह है कि इस बार रक्षाबंधन के दिन भद्रा का पृथ्वी पर वास नहीं रहेगा. ऐसे में बहनें पूरे दिन किसी भी शुभ समय पर अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकती हैं. महंत ने बताया कि भद्रा को लेकर अक्सर लोगों के मन में असमंजस रहता है और इसी वजह से राखी बांधने के समय को लेकर सवाल उठते हैं. लेकिन इस बार ऐसी स्थिति नहीं है. इसलिए शुक्रवार को पूरे दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकता है.

भाई की कलाई पर राखी, बहन को उपहार
रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और एक-दूसरे की सुरक्षा के संकल्प का पर्व है. इस दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं, आरती करती हैं और उसकी कलाई पर राखी या रक्षा सूत्र बांधती हैं. इसके बदले भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेता है और अपनी सामर्थ्य व श्रद्धा के अनुसार उसे उपहार या भेंट देता है.

लक्ष्मी ने सबसे पहले बांधा था रक्षा सूत्र
महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार सबसे पहले माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधा था. इसके अलावा प्राचीन परंपरा में पुरोहित अपने यजमानों को भी रक्षा सूत्र बांधते थे.

कई स्थानों पर प्रजा द्वारा राजा को रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा भी रही है. इसके माध्यम से प्रजा अपनी रक्षा का दायित्व राजा को सौंपती थी और राजा भी उनकी सुरक्षा का संकल्प लेता था. इसी वजह से रक्षा सूत्र को केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं माना गया, बल्कि इसे सुरक्षा, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक भी माना जाता है.

बाजारों में बढ़ी राखी और मेहंदी की मांग
रक्षाबंधन नजदीक आते ही बाजारों में भी पर्व की रौनक दिखाई देने लगी है. दुकानों पर रंग-बिरंगी और अलग-अलग डिजाइन की राखियां सजी हैं. बहनें भाई की पसंद के अनुसार राखियां खरीद रही हैं. वहीं, मेहंदी लगवाने के लिए भी महिलाएं और युवतियां बाजारों का रुख कर रही हैं. शुक्रवार को पर्व होने के चलते लोगों ने परिवार के साथ रक्षाबंधन मनाने की तैयारियां भी पूरी कर ली हैं.

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