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1857 की क्रांति से जुड़ा है तरकुलहा देवी मंदिर का इतिहास, मन्नत पूरी होने पर चढ़ाई जाती है बलि

Tarkulha Mata Temple श्रद्धालु दर्शन के लिए यहां लगातार आते हैं. नव विवाहित जोड़े भी विवाह के उपरांत यहां जरूर आते हैं. कुछ लोग संतान प्राप्ति के लिए भी माता से मुरादे मांगते हैं. मन्नत का धागा भी यहां बांधा जाता है.

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Tarkulha Mata Temple Tarkulha Mata Temple
हाइलाइट्स
  • 1857 की क्रांति से जुड़ी बंधु सिंह की वीरगाथा

  • श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और मान्यताएं

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में तरकुलहा मंदिर का विशेष महत्व है. श्रद्धालु यहां अपनी मुरादे लेकर आते हैं, और मान्यता है कि मांगी गई मुरादे जरूर पूरी होती हैं. नवरात्रि में तो यहां के नजारे और भी भव्य हो जाते है. यहां पर एक महीने तक चलने वाला मेला भी लगता है.

1857 की क्रांति और शहीद बंधु सिंह की कहानी
इस मंदिर से जुड़ी एक पुरानी कथा भी बेहद प्रचलित है, बताया जाता है कि देश की आजादी की प्रथम क्रांति के समय गोरक्षनगरी में भी आजादी की अलख जगी थी. जिसके नायक थे शहीद बंधु सिंह जो पास ही मौजूद देवीपुर स्टेट के वंशज कहे जाते थे. कहा जाता है कि बंधू सिंह रोज जंगल में स्थित तरकुल के पेड़ के नीचे माता की आराधना करते थे और खून चढ़ा कर माता को मनाते थे, जब अंग्रेजों के खिलाफ देश में क्रांति का बिगुल बजा तो बंधू सिंह भी देश की आजादी के लिए क्रांति की जंग में कूद पड़े और उन्होंने कई अंग्रेजों को गोरिल्ला युद्ध शैली के तहत मार कर माता के चरणों में उनका रक्त चढ़ाया.

मंदिर के प्रधान पुजारी बताते हैं कि पहले यहां जंगल हुआ करता था और जंगल के बीचों बीच सात तरकुल के पेड़ थे. उसके नीचे ही बंधु सिंह ने माता की पिंडी बना रखी थी. धीरे-धीरे मंदिर के प्रति लोगों की आस्था बढ़ी और आज यह भव्य रूप ले चुका है.

श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और मान्यताएं
श्रद्धालु दर्शन के लिए यहां लगातार आते हैं. नव विवाहित जोड़े भी विवाह के उपरांत यहां जरूर आते हैं. कुछ लोग संतान प्राप्ति के लिए भी माता से मुरादे मांगते हैं. मन्नत का धागा भी यहां बांधा जाता है. मंदिर से जुड़ी एक और प्रथा है, मान्यता पूरी होने पर श्रद्धालु यहां बलि भी चढ़ाते हैं. इसके लिए मंदिर के बगल में बने एक स्थान पर बकरे की बलि दी जाती है. उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण भी किया जाता है.

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिरों के जीर्णोद्धार की कड़ी में यहां भी बहुत से काम कराए हैं. गोरखपुर शहर से लगभग 10 से 12 किलोमीटर दूरी पर देवरिया रोड पर स्थित है तरकुलहा माता का मंदिर जिसका इतिहास काफी शानदार है.

-रवि गुप्ता की रिपोर्ट