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ग्रेटर नोएडा का वो गांव, जहां आज भी होती है रावण की पूजा, दशहरे पर मनता है शोक

रावण एक श्रेष्ठ ब्राह्मण थे और मंदिर में प्रतिदिन सुबह-शाम उनकी पूजा की जाती है. महंत का कहना है कि रावण भगवान ब्रह्मा के परम भक्त थे और उन्होंने ऐसा कोई कर्म नहीं किया, जिसके कारण उनका पुतला जलाया जाए.

A village where Ravana is still worshipped today A village where Ravana is still worshipped today
हाइलाइट्स
  • इस गांव में रावण दहन की नहीं होती इजाजत!

  • बिसरख की सदियों पुरानी मान्यता

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक ऐसा गांव है, जिसे रावण की जन्मभूमि के रूप में जाना जाता है. इस गांव का नाम बिसरख है. यहां आज भी रावण की पूजा की जाती है. इतना ही नहीं, बिसरख गांव की सीमा में न तो रामलीला का मंचन होता है और न ही रावण दहन किया जाता है. दशहरे के दिन यहां शोक मनाया जाता है.

आज तक की टीम जब बिसरख स्थित रावण मंदिर पहुंची तो वहां के महंत रामदास जी से बातचीत की. उन्होंने बताया कि रावण एक श्रेष्ठ ब्राह्मण थे और मंदिर में प्रतिदिन सुबह-शाम उनकी पूजा की जाती है. महंत का कहना है कि रावण भगवान ब्रह्मा के परम भक्त थे और उन्होंने ऐसा कोई कर्म नहीं किया, जिसके कारण उनका पुतला जलाया जाए. उनका दावा है कि रावण माता सीता को अशोक वाटिका ले गए थे, लेकिन उन्हें अपनी मां के समान सम्मान दिया था. इसी वजह से यहां उनकी पूजा की जाती है.

A village where Ravana is still worshipped today

महंत रामदास ने बताया कि गांव की एक पुरानी परंपरा और मान्यता है, जिसके कारण यहां रामलीला का मंचन नहीं होता. उनका कहना है कि यदि कोई यहां रामलीला कराने या रावण दहन का प्रयास करता है तो उसके साथ अच्छा नहीं होता. उन्होंने दावा किया कि कुछ वर्ष पहले एक मीडिया के लोगो के कहने पर यहाँ रावण का पुतला दहन कराया था, जिसके बाद लोगों के साथ बुरा हुआ.

उन्होंने कहा कि गांव में कभी रामलीला का मंचन नहीं होता. यदि किसी धार्मिक आयोजन में रामायण का प्रसंग होता भी है, तो उसमें राम और रावण के युद्ध का मंचन नहीं किया जाता.

 A village where Ravana is still worshipped today

रावण को खलनायक कहे जाने के सवाल पर महंत रामदास ने कहा कि इस पृथ्वी पर केवल दो ही सबसे बड़े खलनायक हुए हैं एक भगवान परशुराम और दूसरे रावण. उन्होंने दावा किया कि रावण इतना शक्तिशाली था कि शनि उसके पैरों के नीचे थे, इंद्र उसके लिए पानी भरते थे और पवनदेव झाड़ू लगाते थे. उनके अनुसार, रावण जैसा शक्तिशाली कोई नहीं हुआ.

महंत ने बताया कि बिसरख का यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है. चूंकि यह रावण की जन्मभूमि मानी जाती है, इसलिए यहां रावण के साथ भगवान राम, भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा की भी पूजा की जाती है.